सागर। डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग ने प्रो.एस.पी.वाजपेयी के साथ बातचीत का एक सत्र आयोजित किया यह कार्यक्रम वनस्पति विज्ञान विभाग के सक्सेना हॉल में हुआ प्रो.वाजपेयी वनस्पति विज्ञान विभाग के रिटायर्ड प्रोफेसर और पूर्व विभागाध्यक्ष हैं साथ ही विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज के पूर्व डीन भी हैं इस सेमिनार के संयोजक प्रो. दीपक व्यास विभागाध्यक्ष वनस्पति विज्ञान विभाग थे सह-संयोजक डॉ. अमित जुगनू विश्वास और डॉ.पूनम देहरिया थे और आयोजन सचिव डॉ.लेबिन थॉमस थे इसमें लगभग 60 प्रतिभागी शामिल हुए जिनमें अलग-अलग फैकल्टी सदस्य और पोस्ट-ग्रेजुएट व रिसर्च छात्र शामिल थे प्रो. व्यास और डॉ. देहरिया द्वारा परिचय दिए जाने के बाद, वक्ता प्रो. एस.पी.वाजपेयी ने जलवायु परिवर्तन और टिकाऊ विकास सस्टेनेबल डेवलपमेंट की हालिया चुनौतियों पर अपनी बात रखी उन्होंने बताया कि पृथ्वी जीवन को बनाए रखने वाले परस्पर निर्भर सिस्टम से बनी है लेकिन इसे ग्लोबल वार्मिंग, कार्बन डाइऑक्साइड में बढ़ोतरी, पर्यावरण के नुकसान और प्रदूषण जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है उन्होंने कहा कि हाल के पर्यावरणीय मुद्दों में मौसम की चरम घटनाएं तेज गर्मी की लहरें और पर्माफ्रॉस्ट पिघलने से निकलने वाला पुराना कार्बन प्लास्टिक और जहरीले रसायनों का प्रदूषण और जैव विविधता का भारी नुकसान शामिल है जिससे कई प्रजातियां प्रभावित हो रही हैं इसके बाद उन्होंने जलवायु समस्या से निपटने के लिए सामूहिक सामुदायिक कार्रवाई, प्लास्टिक के इस्तेमाल को कम करने और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने पर जोर दिया उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि जलवायु शिक्षा को मजबूत करने इकोसिस्टम की रक्षा करने और टिकाऊ नीतियां लागू करने की जरूरत है इसमें सौर और पवन जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का उपयोग और साथ ही टिकाऊ इलेक्ट्रिक वाहनों और ऊर्जा-कुशल घरों को अपनाना शामिल हो सकता है।
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