लोक कलाएं समाज की धरोहर हैं इसके संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक है

सागर।डॉ.हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय में  इस पांच दिवसीय आयोजन की परिकल्पना सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज के निदेशक सुदेश शर्मा द्वारा की गई है जिसे विश्वविद्यालय के सांस्कृतिक परिषद् के संयुक्त प्रयास से आयोजित किया जा रहा है नाट्य समारोह के तीसरे दिन प्रातःकालीन सत्र में बुंदेली अंचल की सांस्कृतिक पहचान ‘राई’ और ‘स्वांग’ पर विशेष संवाद एवं प्रस्तुति का आयोजन किया गया जिसमें लोक परंपराओं की ऐतिहासिकता, सामाजिक सरोकार और समकालीन प्रासंगिकता पर विस्तृत चर्चा हुई सामाजिक, सांस्कृतिक एवं रंगमंचीय संस्थान, गोरखपुर के निदेशक नारायण पाण्डेय ने लोक कलाकार संतोष पाण्डेय को स्मृति चिन्ह एवं पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया सागर के विख्यात राई कलाकार एवं पद्मश्री स्वर्गीय रामसहाय पाण्डेय के सुपुत्र संतोष पाण्डेय की टीम ने लोकनृत्य ‘राई’ और लोकनाट्य ‘स्वांग’ की प्रभावशाली प्रस्तुति दी प्रस्तुति में पारंपरिक वेशभूषा, लोकसंगीत और जीवंत अभिनय ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया कार्यक्रम के उपरांत पद्मश्री स्वर्गीय राम सहाय पांडेय के सुपुत्र संतोष पांडेय ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि कोई भी कला निम्न नहीं होती, हर कला समाज की धरोहर होती है उन्होंने राई लोकनृत्य की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि समाज के वंचित वर्गों ने हमारी संस्कृति को संरक्षित रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, जिसके लिए हम सभी को उनका आभार व्यक्त करना चाहिए उन्होंने संस्कृति संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया उन्होंने कहा कि लोकनृत्य ‘राई’ केवल एक नृत्य नहीं, बल्कि बुंदेलखंड की सामाजिक चेतना और लोकजीवन की अभिव्यक्ति है इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि सदियों पुरानी है और यह ग्रामीण जीवन उत्सवों तथा सामाजिक परंपराओं से गहराई से जुड़ी हुई है उन्होंने बताया कि ‘स्वांग’ लोकनाट्य की एक सशक्त विधा है जिसकी प्रस्तुति शैली संवाद, गीत और अभिनय के माध्यम से समाज को संदेश देती रही है बदलते समय में भी इन लोक विधाओं की प्रासंगिकता बनी हुई है आवश्यकता है कि नई पीढ़ी इन्हें समझे और संरक्षित करे गोरखपुर से आए नाट्य कलाकारों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता करते हुए लोकनृत्य और नाट्य प्रस्तुति को समृद्ध किया कार्यक्रम में डॉ.शशि कुमार सिंह,अल्ताफ मुलानी, डॉ.विवेक जायसवाल, डॉ.संजय शर्मा सहित कई शिक्षकों के साथ-साथ संगीत,पत्रकारिता रंगमंच विभाग एवं विश्वविद्यालय के कई विभागों के विद्यार्थी उपस्थित रहे ।  

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