सागर।डॉ.हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के रंगनाथन सभागार में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के यशस्वी संस्थापक भारत रत्न महामना पंडित मदनमोहन मालवीय जी की जयन्ती और प्रख्यात शिक्षाविद् विधिवेत्ता,कवि,मनीषी,प्रखर वक्ता सागर के अमर सपूत सागर विश्वविद्यालय के संस्थापक डॉ. सर हरि सिंह की पुण्य तिथि को विश्वविद्यालय सांस्कृतिक परिषद् एवं मालवीय मंच सागर के संयुक्त तत्त्वावधान में गौर-मालवीय पुण्य-उदय कार्यक्रम का आयोजन किया गया देश के प्रख्यात गांधीवादी चिन्तक रघु ठाकुर ने गौर-मालवीय व्यक्ति सृष्टि और दृष्टि विषय पर विशिष्ट व्याख्यान देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय के संस्थापक डॉ हरीसिंह गौर और काशी विश्वविद्यालय के संस्थापक महामना पंडित मदनमोहन मालवीय दोनों ही भारत वर्ष की राष्ट्र विभूति हैं यह गर्व की बात है कि गौर साहब और मालवीय जी दोनों का सीधा संबंध मध्य प्रदेश से है डॉ. गौर सागर के सपूत हैं तो मदनमोहन मालवीय जी के पूर्वज भी मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र से चलकर काशी तक पहुंचे थे उन्होंने कहा कि दोनों ही राष्ट्र विभूतियों ने शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र के उन्नयन का मार्ग चुना था इसके लिए मालवीय जी ने जन सहयोग से वाराणसी में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना की थी जो सर्व विद्या की राजधानी के रूप में प्रसिद्ध हुई, वहीं डॉ. गौर मध्य प्रदेश के सागर जैसे पिछड़े हुए क्षेत्र में स्वयं द्वारा अर्जित धन राशि से सागर विश्वविद्यालय की स्थापना कर बुंदेलखंड में शिक्षा की अलख जगाई थी
उन्होंने कहा कि धन का संग्रह, धन का उपयोग और धन का मितव्ययिता से खर्च करना मालवीय जी के व्यक्तित्व कि विशेषता रही है डॉ.गौर के व्यक्तित्व में भी मालवीय जी इस गुण धर्म की समानता परिलक्षित होती है उनकी मितव्ययिता उनके व्यक्तित्व की विशेष पहलू रहा है दोनों ही महापुरुष विधि के क्षेत्र के महारथी थे गौर साहब ने संविधान सभा के सदस्य के रूप में संविधान निर्माण में योगदान देते हुए नागरिकों के अधिकारों के सजगता पर जोर दिया तो महामना मालवीय जी ने स्वतंत्रता संग्राम के विभिन्न कानूनी लडाइयों को अदालत में मजबूती से अपना पक्ष रखते हुए सफलता दिलाई रघु ठाकुर ने गौर - मालवीय व्यक्ति, श्रृष्टि एवं दृष्टि विषय पर प्रकाश डालते हुए डॉ. हरीसिंह गौर एवं मदनमोहन मालवीय जी के व्यक्तित्व कृतित्व को विस्तार से व्याख्यायित किया विशिष्ट अतिथि के रूप में विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ.एस पी उपाध्याय ने स्वरचित कविता के माध्यम से अपने व्याख्यान का आरंभ करते हुए कहा कि "सागर में दीप जला काशी को तेज मिला, शिक्षा से स्वाधीनता का अमर सन्देश मिला उन्होंने कहा कि गौर और मालवीय दोनों ने ही धन एवं पद का मोह छोड़कर राष्ट्र को प्राथमिकता दी उन्होंने कहा कि 25 दिसम्बर को गौर साहब के शरीर का भौतिक अवसान और मालवीय जी के भौतिक शरीर का अवतरण यह एक संयोग नहीं है अपितु यह संकेत है कि भारत का भविष्य शिक्षा संस्कार और राष्ट्र दृष्टि से संभव है कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. यशवन्त सिंह ठाकुर ने कहा कि डॉ. गौर और मालवीय दोनों ही महापुरुषों ने जो सपने देखे उसको करके दिखाया उन्होंने कहा कि महामना मदनमोहन मालवीय ने शिक्षा के क्षेत्र में महनीय योगदान के लिए भारत रत्न दिया गया यह अत्यंत हर्ष की बात है परन्तु उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान देने वाले सर्वथा उपयुक्त मनीषी डॉ. हरीसिंह गौर को भारत रत्न अभी तक नहीं प्राप्त हो पाया है आशा है शीघ्र ही डॉ. गौर को भारत रत्न प्रदान किया जायेगा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से अध्ययन प्राप्त एवं डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय में अध्यापनरत शिक्षकों के विशिष्ट समूह मालवीय मंच सागर के कार्यक्रम का संचालन मालवीय संघ के संयोजक डॉ. शशिकुमार सिंह ने किया तथा प्रो. दिवाकर शुक्ला ने आभार ज्ञापन किया राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम की समाप्ति के पश्चात् डॉ.हरीसिंह गौर के शिक्षकों ने रघु ठाकुर को डॉ.हरीसिंह गौर को भारत रत्न दिलाने के संबंध में ज्ञापन दिया विश्वविद्यालय के अनेक शिक्षक शोधार्थी,अधिकारी,कर्मचारी और विद्यार्थी उपस्थित रहे ।
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