सोमनाथ शिवलिंग भारत यात्रा सागर पहुंचेगी स्वदेशी मेले में सामूहिक रुद्र पूजा एवं दर्शन 30 दिसंबर को

सागर।भारत की आध्यात्मिक विरासत शावत है और इतिहास इसकी दृढ़ता का साक्षी है एक हजार वर्ष पहले भासा ज्योतिलिंगों में से पहला ज्योतिर्लिंग सोमनाथ भक्ति के प्रतीक के रूप में देखा जाता था यह केवल एक पूजा स्थाल नहीं था बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा का एक शक्तिभंडार था कहा जाता है कि सोमनाथ का शिवलिंग अद्वितीय था क्योंकि यह भूमि को स्पर्श न करके हया में लटका हुआ था इससे एक दैवीय शक्ति निकलती थी जो निकट आने वाले सभी लोगों को प्रभावित करती थी यह पवित्र ऊर्जा केवल आस्था का विषय नहीं थी यह एकअनुभव था हालांकि 1025 ईस्वी में इतिहास ने एक दुखद मोड़ ले लिया जब महमूद गजनवी ने मंदिर में तोडफोड की और शिवलिंग को अपवित्र कर दिया किंतु विनाश होने के बाद भी लोगों में इसके प्रति अटूट भक्ति बनी रही प्राचीन परंपराओं के समर्थक अग्निहोत्री ब्राह्मणों ने मूल सोमनाथ लिंग के टुकडों को संरक्षित किया और सुरक्षित स्थानों पर ले गये उन्होंने इन अवशेषों को एक हजार वर्षों तक सुरक्षित रखा और अत्यंत गोपनीयता के साथ पीढ़ियों तक उनका संरक्षण और उनकी पूजा की शताब्दियों तक महान संतों और आध्यात्मिक संरक्षकों द्वारा लिंग के टुकड़े संरक्षित किये गये उनमें महान संत स्वामी प्रणवानंद भी शामिल थे जो ज्ञान और भक्ति की परंपरा से गहराई से जुडे हुए श्रद्धेय योगी थे स्वामी प्रणवानंद ऋषिकेश के महान संत स्वामी शिवानंद के समकालीन थे जिन्होंने बाद में डिवाइन लाइफ सोसाइटी की स्थापना की इन दो प्रबुद्ध गुरुओं ने शिवलिंग की शक्ति को जानते हुए यह सुनिश्चित किया कि यह तब तक अछूता बना रहे जब तक कि इसके पुनरुत्थान का सही समय न आ जाये इसके बाद ये टुकड़े श्री सीताराम शास्त्री के परिवार की देखभाल में चले गये आचार्यों के  मार्गदर्शन के अनुसार उनके पूर्वजों को लिंग के टुकड़ों को 100 वर्षों तक छिपाकर रखने की पवित्र जिम्मेदारी सौंपी गयी थी टुकडों को पवित्र लिंगम के आकार में ढाला गया और उनकी पूजा की गयी उन्हें स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि समय आने पर ही इन विग्रह को प्रकाश में लाया जाये शंकराचार्य ने संरक्षकों के वंशज श्री सीताराम शास्त्री को ये टुकड़े मेरे पास लाने का निर्देश दिया था जब वह कपड़े में लपेटे हुए इन टुकड़ों को लेकर पहुंचे तो हमने पाया कि लिंगम में एक अद्वितीय चुंबकीय शक्ति थी हम अक्सर आस्था की बात करते हैं लेकिन ऐसे क्षण भी आते हैं जब आस्था प्रत्यक्ष अनुभव में बदल जाती है विग्रह को पकड़कर कोई भी उसी ऊर्जा को महसूस कर सकता है जो कभी सोमनाथ के भव्य कक्ष में भरी रहीं होगी 2007 में जब वैज्ञानिकों ने इन टुकड़ों की सामग्री संरचना का अध्ययन किया, तो पाया कि इसके केंद्र एक मजबूत चुंबकीय क्षेत्र है जो बहुत ही असामान्य है वैज्ञानिकों ने कहा कि उस स्थिति में लटके रहने के लिए यह एक बहुत ही विशेष और दर्लभ प्रकार का चुंबकीय पदार्थ होना चाहिए ऐसा चुंबकीय पत्थर बहुत दुर्लभ है प्राचीन ग्रंथो में लिंग के बारे में कई उल्लेखों से संकेत मिलता है कि यह बहरी अंतरिक्ष से आया हो सकता है शिवभक्ति का सदेश लेकर निकली  सोमनाथ शिवलिंग भारत यात्रा एक ऐतिहासिक एवं दर्लभ यात्रा के रूप देश के 12 राज्य और 140 से अधिक शहरों में होकर गुजर रही है मध्य प्रदेश मैं पवन यात्रा की शुरुआत बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन से हुई अब यह यात्रा सागर में आ रही है श्रद्धालु विशेष उत्सव और श्रद्धा का वतावरण बना हुआ है इस 30 दिसंबर को श्रद्धालु दर्शन कर सकते हैं l

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