पर्यावरण संतुलन के लिए जैव विविधता आवश्यक

सागर. डॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर के प्राणी शास्त्र विभाग में विंटर कोलोकियम के तहत संगोष्ठी का आयोजन किया गया.कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो.नीलिमा गुप्ता ने की और 'ब्रिजिंग जनरेशन: ग्लिमरिंग लाइफ साइंस' विषय पर अपना उद्बोधन दिया.उन्होंने जैव विविधता के संरक्षण पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रकृति में बहुत सी प्रजातियाँ लुप्त होती जा रही हैं.हमें लुप्त होती प्रजातियों को संरक्षित करना चाहिए जिससे पर्यावरण का सन्तुलन बना रहे.उन्होंने बताया कि प्रतिकूल परिस्थितियों जैसे अत्याधिक निम्न तापमान पर रहने वाले जीवो की शारिरिक क्रियाविधि तथा अनूकूलन जैसे विषयों पर भी विद्यार्थी तथा शिक्षकों को चर्चा की जानी चाहिए और जीव संरक्षण एवं उनके उन्नयन पर कार्यशालाओं का आयोजन किया जाना चाहिए.जैव विविधता पर्यावरण संतुलन के लिए आवश्यक है.वरिष्ठ प्रो.डी.पी.गुप्ता ने नए शोधों का उल्लेख करते हुआ बताया कि बायोलॉजिकल रिसर्च की आवश्यकता अन्य शोधों से ज्यादा है क्योंकि रोज नए-नए वायरस से समस्त प्राणी प्रभावित हो रहे हैं. हम सभी रोज नए-नए वायरस के वैरिएंट से प्रभावित हो रहे हैं जिसकी रोकथाम के लिए आवश्यक है कि इन विषयों पर ज्यादा शोध हों एवं वायरस को पहचानने और इनसे बचने की नई एवं उन्नत तकनीकें विकसित की जाएँ.फार्मेसी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो.यू.के.पाटिल ने जैविक खाद्य पदार्थ के अनुप्रयोगों पर प्रकाश डाला. अधिष्ठाता प्रो वर्षा शर्मा एवं प्राणी शास्त्र की विभागाध्यक्ष प्रो.श्वेता यादव के समन्वयन में इस संगोष्ठी का आयोजन किया गया.संयोजक डॉ.मालविका सिकदर एवं सह-संयोजक डॉ.दीपाली जाट थीं.कार्यक्रम में पोस्टर एवं ओरल प्रेजेंटेशन का प्रदर्शन किया जाएगा.

Post a Comment

0 Comments