सागर. डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर एवं जनजातीय मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में जनजातीय गौरव दिवस का आयोजन विश्वविद्यालय के रंगनाथन भवन में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता ने भारतीय समाज एवं संस्कृति में जनजातीय समाज की भूमिका को रेखांकित किया। एवं जनजातीय समाज की विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ते हुए प्रतिनिधित्व को भी सराहा। उन्होंने कहा वर्तमान शिक्षा प्रणाली अर्थात् नवीन शिक्षा नीति के अंतर्गत जनजातीय कौशल, संस्कृति एवं जीवन शैली की प्रासंगिकता और भी अधिक बढ़ जाती है। यदि हम आज 150 वर्ष बाद भी किसी महानायक की जयंती मना रहे है, उसके कार्यों को याद कर रहे है तो वह हमारे लिए अनुकरणीय एवं प्रेरणा स्त्रोंत है। यदि हमें भारतीय ज्ञान परंपरा एवं संस्कृति को समझना है तो हमें जनजातीय ज्ञान दर्शन एवं परंपरा को समझना आवश्यक है। जनजातीय ज्ञान के बिना भारतीय ज्ञान दर्शन अधूरा है।कार्यक्रम के मुख्य वक्ता मानवशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. अजीत जायसवाल ने जनजातीयों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से लेकर वर्तमान परिदृष्य को रेखाकिंत किया, एवं भगवान बिरसा मुंडा के जीवन दर्शन एवं संघर्ष  पर विष्लेषणात्मक विवेचना पर अपना पक्ष रखा। इसके अतिरिक्त वर्तमान की भारत सरकार द्वारा किए गए प्रयासों का भी उल्लेख किया गया।विशिष्ट अतिथि प्रो, ए.डी. शर्मा, अधिष्ठाता छात्र कल्याण द्वारा जनजातीय समस्याओं के लिए ग्रामीण एवं शहरी विकास के अंतर्गत होने वाले भेदभाव को रेखाकिंत किया गया। बढ़ते हुए नगरीकरण एवं भौतिक सुखों की आवश्यकता कहीं न कहीं जनजातीय  शोषण का आधार बनती है, उन्होने इसके लिए तटस्थ शोध की महती आवश्यकता पर जोर दिया।