केन्द्रीय जेल सागर में विधिक जागरूकता कौशल विकास एवं शैक्षणिक उपलब्धियों का सम्मान समारोह सम्पन्न

सागर।केन्द्रीय जेल सागर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सागर के तत्वावधान में बंदियों के विधिक अधिकारों एवं उपलब्ध विधिक सहायता के संबंध में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया कार्यक्रम में बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों,कर्तव्यों एवं न्याय प्राप्त करने की प्रक्रिया की जानकारी दी गई कार्यक्रम के दौरान ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान के सहयोग से जेल में निरुद्ध 30 महिला बंदियों को आर्टिफिशियल क्रिएटिव ज्वेलरी निर्माण का प्रशिक्षण प्रदान किए जाने के उपरांत प्रमाण-पत्र वितरित किए गए महिला बंदियों ने प्रशिक्षण के दौरान सीखे गए ज्वेलरी निर्माण कौशल का जीवंत प्रदर्शन करते हुए डेमो प्रस्तुत किया जिसे उपस्थित अतिथियों ने सराहा इस अवसर पर महिला बंदियों ने सामूहिक सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं नृत्य की प्रस्तुति भी दी जेल में रहकर विभिन्न परीक्षाएं उत्तीर्ण करने वाले 32 बंदियों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों का सम्मान किया गया इसी प्रकार गीता परिवार के मार्गदर्शन में गीता अध्ययन एवं विभिन्न स्तरों की परीक्षाएं पूर्ण करने वाले 11 बंदियों को भी प्रमाण-पत्र वितरित किए गए विशेष रूप से बंदी नितिन पिता शिवराम दुबे ने गीता जिज्ञासु परीक्षा में 100 में से 100 अंक प्राप्त कर गीता जिज्ञासु की उपाधि हासिल की उनकी इस उपलब्धि पर प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया इस अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव अंकित श्रीवास्तव ने बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों एवं कर्तव्यों की जानकारी दी उन्होंने न्याय प्राप्त करने की प्रक्रिया एवं उपलब्ध विधिक सहायता के संबंध में भी जानकारी दी लीगल एंड डिफेंस काउंसिल के सदस्यों ने बंदियों की विधिक समस्याओं का समाधान किया कार्यक्रम में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश सुधांशु सक्सेना, जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश सुश्री समीक्षा सिंह, जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश समरेश सिंह, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी  रोहित शर्मा, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अंकित श्रीवास्तव, चीफ लीगल एंड डिफेंस काउंसिल  राजेश विदौल्या, ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान की डायरेक्टर श्रीमती नीलिमा जैन, जेल अधीक्षक रमेश चंद्र आर्य, उप जेल अधीक्षक मनोज मिश्रा सहित जेल के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे कार्यक्रम के अंत में जेल अधीक्षक रमेश चंद्र आर्य ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया उन्होंने प्रमाण-पत्र प्राप्त करने वाले सभी बंदियों को शुभकामनाएं देते हुए अन्य बंदियों को भी शिक्षा एवं कौशल विकास के माध्यम से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने तथा सकारात्मक जीवन के लिए प्रेरित किया।

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