डॉ हरीसिंह गौर केन्द्रीय विश्वविद्यालय में ऑनलाइन सारस्वत व्याख्यान का हुआ सफल आयोजन

सागर।डॉ.हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग एवं आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोजित मासिक सारस्वत व्याख्यानमाला के अन्तर्गत षष्ठ व्याख्यान का आयोजन ऑनलाइन माध्यम से संपन्न हुआ इस व्याख्यान का विषय आचार्य भर्तृहरि के वाक्यपदीयं में स्फोटविवेचन रहा कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राजकीय महाविद्यालय महोबा, चरखारी, के प्राचार्य प्रो.उमाशंकर त्रिपाठी थे कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. यशवंत सिंह ठाकुर ने की अपने व्याख्यान में प्रो. उमाशंकर त्रिपाठी ने बताया कि व्याकरण एक दर्शन शास्त्र है आचार्य भर्तृहरि ने अपने वाक्यपदीयम् में शब्द को ब्रह्म कहा है और व्याकरण का दार्शनिक पक्ष प्रस्तुत किया है उन्होंने बताया कि वह शब्द ही स्फोट है स्फुटति प्रकाशते अभिव्यज्यते वाsर्थोsनेन, अस्माद् वेति स्फोट इस व्युत्पत्ति के अनुसार जिस तत्व से अर्थ का प्रकाशन या अभिव्यक्ति होती है उसे स्फोट कहते हैं न सोsस्ति प्रत्ययो लोके य: शब्दानुगमादृते संसार में ऐसा कोई अर्थ या ज्ञान नहीं जो शब्द के बिना अस्तित्व में आता हो विद्वान् शब्द में दो तत्व मानते हैं ध्वनि तथा स्फोट स्फोट ध्वनि को प्रकाशित करती है उसके पश्चात् स्फोट तत्व या ध्वनि शब्द की आत्मा से अर्थ की अभिव्यक्ति होती है उमाशंकर त्रिपाठी ने वाणी के चार भागों परा,पश्यन्ती मध्यमा,वैखरी की विस्तार से चर्चा की उन्होंने इयं सा मोक्षमाणानां अजिह्मा राजपद्धति इस वाक्यपदीयं के पद्य को उद्धृत करते हुए व्याकरण को ब्रह्म प्राप्ति का सहज सरल मार्ग बताया कार्यक्रम में IQAC के निदेशक प्रो. अनिल जैन ने कहा कि इस प्रकार के व्याख्यान विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों की अकादमिक दृष्टि को व्यापक बनाते हैं तथा उनमें शोधपरक चिंतन विकसित करते हैं भाषा अध्ययनशाला की अधिष्ठाता प्रो. रश्मि सिंह ने अपने उद्बोधन में विद्यार्थियों को भारतीय सांस्कृतिक धरोहर के गहन अध्ययन हेतु प्रेरित किया
कार्यक्रम की संयोजक डॉ.किरण आर्या ने व्याख्यानमाला की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों को अनेक विषयों को गहराई से सोचने का अवसर देते हैं तथा व्याकरण के प्रति गहरी रुचि जागृत करते हैं स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय के संस्कृत विभागाध्यक्ष डा. सुकदेव वाजपेई ने उमाशंकर त्रिपाठी का स्वागत किया विभाग के शोधार्थी प्रवीण मिश्र ने कार्यक्रम का संचालन किया मंगलाचरण दिग्विजय तिवारी ने किया तथा धन्यवाद विभाग के शोधार्थी चित्रांश कन्हौआ ने किया कार्यक्रम आयोजन मंडल के सदस्य संस्कृत विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. शशि कुमार सिंह डा. नौनिहाल गौतम एवं डा रामहेत गौतम ने कार्यक्रम के सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई इस अवसर पर दिल्ली विश्वविद्यालय से संस्कृत विभाग के आचार्य संजय कुमार,आदि कई विद्वान् शोधार्थी विद्यार्थी आभासीय माध्यम से जुड़कर कार्यक्रम को सफल बनाया।

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