सागर। विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में कवयित्री श्रीमती नीरजा पांडे के दो नवीन काव्य-संग्रह 'रसधारा' और अर्चना के अक्षत का भव्य विमोचन समारोह 16 जून 2026 को सायं 5 बजे डॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के अभिमंच सभागार में संपन्न हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ मंचासीन अतिथियों द्वारा मां सरस्वती,भारत माता एवं डॉ. हरीसिंह गौर के चित्र के पूजन तथा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया कार्यक्रम की अध्यक्षता भारतीय शिक्षण मंडल महाकौशल प्रांत की संरक्षक और डॉक्टर हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय की लोकपाल प्रोफेसर अर्चना पांडे ने की मुख्य अतिथि के रूप में डॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर यशवंत सिंह ठाकुर उपस्थित रहे तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में भारतीय शिक्षण मंडल के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख डॉ. संजय पाठक का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ सारस्वत अतिथि के रूप में कवयित्री श्रीमती नीरजा पांडे, सेवानिवृत्ति शासकीय शिक्षिका समारोह में सम्मिलित रहीं कार्यक्रम में ध्येय श्लोक का वाचन डॉ. देवकी नंदन शर्मा एवं ध्येय वाक्य का वाचन डॉ. संदीप शुक्ला द्वारा किया गया विषय प्रवर्तन एवं कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के संयुक्त कुलसचिव संतोष सोहगौरा ने कहा कि विश्वविद्यालय में साहित्य एवं संस्कृति के क्षेत्र में आयोजित यह महत्वपूर्ण आयोजन समाज को सकारात्मक दिशा प्रदान करने वाला है उन्होंने कहा कि श्रीमती नीरजा पांडे का यह दोनों नवीन काव्य-संग्रह रसधारा और अर्चना के अक्षत, समकालीन समाज मानवीय संवेदनाओं तथा जीवन मूल्यों का सशक्त दस्तावेज है दोनों काव्य संग्रहों की विभिन्न रचनाओं पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने उसकी भाषा, शैली एवं भाव पक्ष की सराहना की इस अवसर पर मंचासीन अतिथियों द्वारा काव्य-संग्रह का विधिवत विमोचन किया गया अपनी भावनाएँ व्यक्त करते हुए कवयित्री श्रीमती नीरजा पांडे ने कहा कि यह अवसर उनके लिए अत्यंत हर्ष, संतोष और भावनात्मक अनुभूति का क्षण है उन्होंने कहा कि अपने काव्य-संग्रह के विमोचन के अवसर पर सभी साहित्यप्रेमियों एवं शुभचिंतकों की उपस्थिति उनके लिए सम्मान और प्रेरणा का विषय है मुख्य अतिथि कुलगुरु प्रोफेसर यशवंत सिंह ठाकुर ने कहा कि किसी भी पुस्तक का प्रकाशन केवल एक साहित्यिक घटना नहीं होता बल्कि यह लेखक की संवेदनाओं, अनुभवों, चिंतन और रचनात्मक साधना की दीर्घ यात्रा का साकार रूप होता है उन्होंने कहा कि कविता मनुष्य के हृदय की सबसे सहज एवं प्रभावी अभिव्यक्ति है, जो समाज की भावनाओं संघर्षों, आशाओं और आकांक्षाओं को शब्द प्रदान करती है प्रस्तुत काव्य-संग्रह में जीवन के विविध रंगों, मानवीय मूल्यों और सामाजिक सरोकारों का सुंदर चित्रण दिखाई देता है उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह कृति पाठकों को चिंतन, प्रेरणा और संवेदना का नया आयाम प्रदान करेगी तथा साहित्य के माध्यम से समाज में सकारात्मक चेतना के प्रसार में सहायक सिद्ध होगी इस अवसर पर भारतीय शिक्षण मंडल की प्रांत महिला गतिविधि सह-प्रमुख श्रीमती शोभा सराफ, प्रोफेसर संतोष शुक्ला प्रोफेसर सुबोध पांडे, प्रोफेसर अनिल तिवारी, डॉ. रवि भट्ट, डॉ. विवेक तिवारी, डॉ. नरेंद्र बौद्ध, डॉ. सत्यनारायण देवलिया, डॉ. दिव्या भनोट, श्रीमती सांभवी शुक्ला, डॉ भरत पटेल, श्रीमती निधि पांडे, डॉक्टर कल्पतरु दास, डॉ कल्पना शर्मा, डॉ चंद्रलता सिंह, आशीष उपाध्याय, डॉ दीपाली जाट, डॉ पूर्णिमा वर्मा, डॉ जयंत दुबे सहित विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य नागरिक, शिक्षाविद् एवं शिक्षकगण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
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