डॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय की नाट्य टीम ने NCZCC में रचा इतिहास

सागर।डॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय  की सांस्कृतिक परिषद् के रंगमंच दल ने अपनी नाट्य प्रस्तुति चंदा बेड़नी से समूचे प्रेक्षागृह को भाव-विभोर कर दिया नाटक की समाप्ति पर दर्शक अपनी सीटों से उठ खड़े हुए और देर तक करतल ध्वनि से प्रेक्षागृह गुंजायमान रहा यह दृश्य विश्वविद्यालय की इस टीम की असाधारण सफलता का प्रमाण था NCZCC प्रयागराज के विशेष आमंत्रण पर विश्वविद्यालय की रंगमंच टीम इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय महोत्सव में सहभागी बनी इस महोत्सव में देशभर की पाँच चुनिंदा विश्वविद्यालय टीमों को प्रस्तुति का अवसर मिला था, जिनमें डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय की टीम ने सर्वाधिक प्रभाव छोड़ा विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा इस टीम का नेतृत्व ललितकला एवं प्रदर्शनकारी कला विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नीरज उपाध्याय को सौंपा गया था, जो स्वयं इस नाटक के निर्देशक भी हैं प्रख्यात साहित्यकार अलखनंदन जी द्वारा लिखित यह संगीतमय नाटक बुंदेलखंड के एक गाँव की लोककथा पर आधारित है कथा की केंद्र में है चंदा एक प्रतिभाशाली और खूबसूरत लोक नर्तकी जो अपने नृत्य और गायन से सबका मन मोह लेती है उसका दिल धड़कता है गाँव के एक सीधे-सादे युवक लखन के लिए लेकिन समाज की रुढीवादी सोच इस निश्छल प्रेम के आड़े आ जाती है ये कथा प्रेम के बहाने समाज में महिलाओं की स्थिति को भी गंभीरता से दर्शकों के समक्ष रखता है चंदा की सुंदरता और कला पर मोहित राजा आकाश श्रीवास्तव जिसके पास पहले से सैकड़ों रानियाँ हैं उसे अपने महल में लाना चाहता है और धन-दौलत से ललचाने की कोशिश करता है किंतु चंदा का मन डिगता नहीं प्रेम और सत्ता के इस त्रिकोण में जब समाज की रुढ़िवादी व्यवस्था हावी होती है, तो चंदा और लखन का प्रेम सामाजिक दबाव में दम तोड़ देता है यह मार्मिक अंत दर्शकों को भीतर तक झकझोर देता है नाटक में रितिका सेन ने चंदा की भूमिका में जीवंत अभिनय किया, जबकि देव वृष अहिरवार ने लखन की भूमिका को पूर्ण संवेदना से प्रस्तुत किया नृत्य संयोजन नितिन गोंड का रहा मंच परिकल्पना में प्रियांश, दीपेंद्र सागर, अखिलेश, संजू और देव का योगदान रहा अन्य कलाकारों में दीपेंद्र सिंह लोधी, कृष्णा देवलिया, सागर सिंह ठाकुर, प्रिया गोस्वामी और संजू आठिया ने भी उत्कृष्ट अभिनय किया।

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