अत्यंत दुर्लभ बीमारियों से बचाया जब नवजात को अस्पताल लाया गया तो वह तेज बुखार पेट में सूजन और गंभीर संक्रमण से जूझ रहा था विस्तृत जांच में जो सामने आया उसने डॉक्टरों को भी हैरान कर दिया शिशु एक साथ चार जानलेवा स्थितियों से लड़ रहा था मल्टीपल लीवर एब्सेस जिसमें लिवर में मवाद (पस) जमा हो जाना सेप्टीसीमिया विथ मेनिनजाइटिस जिसमें रक्त में गंभीर संक्रमण के साथ दिमागी बुखार गंभीर एस्टेट्स (ascites) जिसमें पेट में अत्यधिक तरल पदार्थ का जमा होना जैसी बीमारियों से जूझ रहा था सीनियर पीडियाट्रिशियन डॉ. पी.एस. ठाकुर ने बताया कि दुनिया भर के चिकित्सा साहित्य में इस तरह के बहुत कम मामले दर्ज हैं ऐसी जटिल स्थिति में जीवित बचने की दर (Survival Rate) महज 50% होती है 1 माह से छोटे बच्चे पर इतनी जटिल प्रक्रिया करना चिकित्सा टीम के लिए एक बड़ी चुनौती थी शिशु की जान बचाने के लिए लिवर से पस निकालना अनिवार्य था अस्पताल की सर्जिकल और इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिकल टीम जिसमें डॉ.विशाल गजभिये, डॉ. श्रेया ठाकुर और डॉ.सनी गुप्ता शामिल थे एक साहसिक निर्णय लिया टीम ने यूएसजी (USG) गाइडेंस के तहत लिवर में ' पिगटेल कैथिटर' डालकर सफलतापूर्वक मवाद को बाहर निकाला यह प्रक्रिया इतने छोटे बच्चे के लिए अत्यंत जोखिम भरी थी जिसे टीम ने निपुणता से अंजाम दिया गहन निगरानी और समर्पित उपचार के बाद, बच्चा अब पूरी तरह स्वस्थ है और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है परिजनों ने चैतन्य हॉस्पिटल की टीम को आभार व्यक्त किया है अब जटिल नवजात रोगों के उपचार में एक मिसाल बन गया है यह सफलता सिद्ध करती है कि अब बड़े शहरों की ओर भागने के बजाय, सागर में ही विश्वस्तरीय और जटिल सर्जरी संभव हैं।
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