सागर.डॉ.हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के वैदिक अध्ययन विभाग द्वारा 5 दिसंबर 2024 को विभागीय स्थापना दिवस मनाया गया. इस कार्यक्रम का उद्धघाटन विभागाध्यक्ष प्रोफेसर दिवाकर शुक्ला ने दीप प्रज्वलन कर किया. सरस्वती वन्दना सुश्री करिश्मा अहिरवार एवं श्रेया राजपूत ने की. विभागाध्यक्ष प्रोफेसर दिवाकर शुक्ला ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा भारतवर्ष की अमूल्य धरोहर है. हमारी परम्पराएं व्यक्तियों को मन से जोड़ती हैं तथा एक-दूसरे का सम्मान करना सिखाती हैं.ज्ञान का प्रवाह श्रद्धा भाव से उत्पन्न होता है। भारतीय वेदों,शास्त्रों में गूढ़ ज्ञान छिपा हुआ है जिसे खोजकर जन-जन तक पहुंचाना हम सभी का कर्तव्य है.डॉ.खेड़लेकर ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्राचीन भारतीय विश्वविद्यालयों के पुस्तकालयों में भारतीय ज्ञान भरा पड़ा था जो कि समय के साथ विलुप्त हो गया.जो कुछ भी उपलब्ध है उसे पुनः हासिल करना है.भारतीय ऋषि-मुनियों ने परमाणु की अवधारणा को परिभाषित किया था। डॉ.आयुष गुप्ता ने गुरूत्वाकर्षण सिद्धांत एवं सूत्रों की अवधारणा पर प्रकाश डाला. सुश्री शिवानी खरे ने वैदिक गणित की तकनीक एवं सुगम गणना के वैदिक सिद्धांतों की जानकारी दी. व्याख्यान उपरांत वैदिक ज्ञान पर क्विज प्रतियोगिता हुई.
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