मानव अस्तित्व के लिए आवश्यक है बढ़ते जल प्रदूषण का समन्वित प्रबंधन

सागर. डॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर की कुलपति प्रो.नीलिमा गुप्ता ने साउथ एशियन इंस्टीट्यूट फॉर एडवांस्ड रिसर्च एंड डेवलपमेंट-सेंटर फॉर रिवर अफेयर्स के आमंत्रण पर श्रीलंका के केलानिया विश्वविद्यालय में 8-9 नवंबर 2024 को आयोजित तृतीय अंतर्राष्ट्रीय रिवर कांग्रेस के उद्घाटन सत्र में मुख्य वक्तव्य दिया.उन्होंने नदी प्रदूषण आर्थिक स्थिरता के लिए जलीय जीव स्वास्थ्य को बनाए रखने के कारण और नियंत्रण विषय पर मुख्य वक्तव्य देते हुए कहा कि भारत में गंगा नदी का स्थान लोगों के जीवन में सदियों से पवित्र नदी के रूप में रहा है. हमारे पूर्वज पहले नदी का जल ग्रहण करते थे, फिर उनका स्थान कुओं ने लिया, फिर हम नल का उपयोग करने लगे और आज हम पीने के लिए बोतल बंद पानी इस्तेमाल करते हैं.  पीढ़ी दर पीढ़ी यह परिवर्तन हमें स्वच्छ जल के भविष्य के प्रति कई गहरे संकेत करता है.उन्होंने भारत में नदियों की व्यवस्था को स्पष्ट करते हुए इंडस बेसिन, गंगा-ब्रह्मपुत्र-मेघना बेसिन और कावेरी, कृष्णा, गोदावरी सहित अन्य बेसिनों एवं इसके परिक्षेत्र, इनकी सहायक नदियों, इनके महत्व और इन जल स्रोतों के समक्ष आ रही चुनौतियों को रेखांकित करते हुए विस्तारपूर्वक चर्चा की.उन्होंने नदियों में पाए जाने वाले जलीय जीवों विशेष रूप से मछलियों एवं अकशेरुकी प्राणियों की भी चर्चा की। उन्होंने जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण में नदियों के महत्व, भूमिका और योगदान पर चर्चा करते हुए कहा कि नदियां विविध जलीय जीव प्रजातियों को न केवल आवास प्रदान करती हैं बल्कि खनिज और पोषक तत्वों की आपूर्ति को बनाए रखने में, बाढ़ के क्षेत्रों और आर्द्र भूमि के जलस्तर को नियंत्रित करने में मदद करती हैं। नदियों की पारिस्थितिकी जलवायु परिवर्तन अनुकूलन में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। 

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