सागर। डॉ हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय में स्थापित "स्वदेशी ज्ञान अध्ययन केंद्र" द्वारा ‘वर्ल्ड इंडिजेनस डे’ मनाया गया. इस अवसर पर भारतीय ज्ञान परम्परा पर विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया जिसमें मुख्य वक्ता प्रो. ओमप्रकाश पांडे, सेवानिवृत प्रोफेसर, भौतिकी विज्ञान कलकत्ता विश्वविद्यालय ने विशिष्ट व्यख्यान दिया। उन्होंने भारतवर्ष के इस अनुपम ज्ञान पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि आज हम अपनी संस्कृति को भूल कर पश्चिमी देशों की संस्कृति को अपनाकर महान मान रहे है जो कि हमारी भूल है. आज आवश्यकता इस बात की है कि हम अपने मूल रहस्य को समझ कर इसे आम जनमानस के सामने रखे. जिसका ध्यान भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति में प्रयास हो रहा है. जबकि इसी संस्कृति से अन्य संस्कृतियों का जन्म हुआ है. हमारी भारतीय ज्ञान परम्परा सर्वश्रेष्ठ है. यह बात हमें इस युवा पीड़ी को अवगत कराना होगा. हमारे वेद उपनिषदों में कई प्रमाण है जिसकी पश्चिमी देश ने किया है. कुलपति प्रो नीलिमा गुप्ता ने स्वदेशी ज्ञान अध्ययन केंद्र की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए वर्तमान समय में भारत में भारतीय ज्ञान परम्परा पर खोले गये केन्द्रों की स्थिति को बताया. भारत सरकार इस क्षेत्र में तेजी से काम कर रही है जिस पर देश के सभी विश्वविद्यालय को अपना योगदान करना चाहिए. उन्होंने कहा कि संभवतः देश का यह पहला विश्वविद्यालय है जहाँ पर वैदिक विभाग के साथ साथ स्वदेशी ज्ञान अध्ययन केंद्र खोला गया है जहाँ पर पठन पाठन तथा अनुसंधान कार्य हो सके। इसमें हमे सफलता भी मिलती जा रही है. उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा ज्ञान के सभी विषयों एवं अनुशासनों से जुड़ी हुई है। सभी विषय के अध्येताओं को इसमें रुचि लेनी चाहिए।
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