दर्शन परिषद् म.प्र. एवं छ.ग. के 22 वें वार्षिक राष्ट्रीय अधिवेशन का समापन

सागर। दर्शन परिषद् मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के 22 वें वार्षिक राष्ट्रीय अधिवेशन का विश्वविद्यालय के अभिमंच सभागार में समापन हुआ यह अधिवेशन भारतीय दार्शनिक अनुसन्धान परिषद् नई दिल्ली की वित्तीय सहायता से दर्शनशास्त्र विभाग डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय एवं स्वामी विवेकानन्द विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोजित किया गया समापन सत्र की अध्यक्षता दर्शन परिषद् के अध्यक्ष प्रो. भरत कुमार तिवारी ने की इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे डॉ. अतुल पाण्डेय संकायाध्यक्ष एवं विभागाध्यक्ष व्यवसाय एवं प्रबन्धन विभाग अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा विशिष्ट अतिथि थे डॉ. आदर्शपल्ली नटराजू अध्यक्षव दर्शन केन्द्र जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय दिल्ली कार्यक्रम का संचालन दर्शन परिषद् के सचिव प्रो. श्रीकान्त मिश्र ने किया स्वागत उद्बोधन एवं दो-दिवसीय अधिवेशन का प्रतिवेदन आयोजक सचिव डॉ. अनिल कुमार तिवारी,अध्यक्ष दर्शनशास्त्र विभाग द्वारा प्रस्तुत किया गया उन्होंने बताया कि 8 सत्रों में 61 शोध-पत्रों का वाचन एवं प्रस्तुतीकरण हुआ जिनमें 22 व्याख्यानमालाएँ भी शामिल हैं निर्णायक मण्डल द्वारा चयनित 11 प्रतिभागियों को युवा दार्शनिक पुरस्कार दिये गए परिषद् के आगामी अधिवेशन में बलराम चौरसिया स्मृति भारतीय लोक जीवन व्याख्यानमाला के अयोजन हेतु सागर के गवेषणा संस्थान के अध्यक्ष डॉ. मनोहरलाल चौरसिया द्वारा परिषद् को रु. 51,000/- की राशि भेंट की गई मुख्य अतिथि प्रो. अतुल पाण्डेय ने कहा कि दर्शनशास्त्र को अकादमिक नेतृत्व की भूमिका में होना चाहिए अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए परिषद् के अध्यक्ष प्रो. भरत कुमार तिवारी ने कहा कि जब हमारे जीवन में सदाचार आ जाए तब समझें कि हमारे जीवन में धर्म आ गया अंत में सभी का औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन परिषद् के कोषाध्यक्ष डॉ. देवदास साकेत ने किया।

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