सागर।पंडित दीनदयाल उपाध्याय शासकीय कला एवं वाणिज्य अग्रणी महाविद्यालय के हिंदी विभाग के तत्वावधान में महान साहित्यकार एवं 'उपन्यास सम्राट' मुंशी प्रेमचंद की 146वीं जन्मजयंती हर्षोल्लास एवं गरिमामय वातावरण में मनाई गई कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्य और सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. सरोज गुप्ता ने की इस अवसर पर प्रशासनिक अधिकारी डॉ. इमराना सिद्दीकी एवं वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. अमर कुमार जैन की विशेष उपस्थिति रही अध्यक्षीय संबोधन में प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता ने मुंशी प्रेमचंद के साहित्यिक अवदान को याद करते हुए कहा कि प्रेमचंद जी ने 300 से अधिक कहानियों और कालजयी उपन्यासों की रचना कर हिंदी साहित्य को एक नई दिशा दी वे एक अत्यंत संवेदनशील साहित्यकार थे जिन्होंने समाज में व्याप्त रूढ़ियों रूपी पत्थरों को हटाने का साहसिक कार्य किया यदि उनका अधूरा उपन्यास 'मंगलसूत्र' पूरा हो जाता तो हम उनके जीवन दर्शन को और गहराई से समझ सकते डॉ. गुप्ता ने विद्यार्थियों से उनके साहित्य से संवेदनशीलता त्याग और समर्पण के मूल्यों को जीवन में उतारने का आह्वान किया वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. अमर कुमार जैन ने कहा कि प्रेमचंद जी ने मात्र 56 वर्ष की अल्पायु में ही हिंदी साहित्य को ऐसी अमूल्य निधि सौंपी है, जिसे पढ़ते ही पाठक भावविभोर हो उठता है तमाम संघर्षों के बावजूद वे आजीवन वंचित, शोषित और पीड़ित समाज के साथ मजबूती से खड़े रहे हिंदी विभाग के डॉ.अवधेश प्रताप सिंह ने कहा कि प्रेमचंद जी को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि आज प्रत्येक विद्यार्थी उनकी कम से कम एक रचना को अवश्य पढ़े कार्यक्रम के दौरान एम.ए. प्रथम एवं द्वितीय सेमेस्टर के विद्यार्थियों जयदीप, गोविंद कुर्मी, अंजली प्रजापति एवं विवेक श्रीवास्तव ने मुंशी प्रेमचंद की प्रमुख रचनाओं के अंशों का पाठ किया तथा उनके साहित्य पर अपने विचार साझा किए समारोह में डॉ. रविंद्र सिंह ठाकुर, डॉ. वसुंधरा गुप्ता, डॉ. शालिनी परिहार, शुभम दुबे एवं मनोचिकित्सा सलाहकार श्रीमती नीता यादव सहित महाविद्यालय के प्राध्यापक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे
कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. राना कुंजर सिंह द्वारा किया गया तथा आभार प्रदर्शन हिंदी विभाग के डॉ. सुरेंद्र यादव ने किया।
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