जिला बदर की कार्रवाई पर उठे सवाल सीसीटीवी फुटेज और एफआईआर की टाइमिंग में आया बड़ा अंतर

​सागर।पुलिस की कार्यप्रणाली और जिला बदर की एक कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं कोतवाली थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले भीतर बाजार इलाके का एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां पुलिस की एफआईआर में दर्ज घटना के समय और पीड़ित परिवार द्वारा पेश किए गए सीसीटीवी फुटेज की टाइमिंग में बड़ा विरोधाभास देखने को मिल रहा है इस वैज्ञानिक साक्ष्य के सामने आने के बाद अब पीड़ित परिवार इंसाफ के लिए पुलिस के आला अधिकारियों के चक्कर काट रहा है ​पूरा मामला कोतवाली थाना क्षेत्र के रहने वाले रिप्पी साहू से जुड़ा है पूर्व में जिला कलेक्टर के आदेश पर रिप्पी साहू के खिलाफ जिला बदर की कार्रवाई की गई थी इस आदेश के खिलाफ रिप्पी साहू ने सागर संभागायुक्त के समक्ष अपील दायर की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए संभागायुक्त ने जिला बदर की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी और राहत देते हुए सप्ताह में दो बार कोतवाली थाने में हाजिरी लगाने का आदेश जारी किया था इसी बीच बीते 27 मई 2026 को सुशील साहू नामक व्यक्ति ने कोतवाली थाने में रिप्पी साहू के खिलाफ एक नई एफआईआर दर्ज कराई शिकायत में आरोप लगाया गया कि रिप्पी साहू ने दोपहर ठीक 2:00 बजे कोतवाली रोड पर सुशील को रोककर गाली-गलौज और मारपीट की इस नई एफआईआर को आधार बनाते हुए कोतवाली पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए 30 मई 2026 को रिप्पी साहू को फिर से जिला बदर कर दिया इस कार्रवाई के बाद अब पीड़ित पक्ष ने पुलिस की थ्योरी को चुनौती दी है रिप्पी साहू की सास कुसुम विश्वकर्मा ने बताया कि उनके दामाद को साजिश के तहत झूठे मामले में फंसाया गया है पीड़ित परिवार द्वारा सौंपे गए घर के सीसीटीवी फुटेज के अनुसार, रिप्पी साहू 27 मई को दोपहर 1 बजकर 57 मिनट पर अपने घर से निकलते दिखाई दे रहे हैं और दोपहर 2 बजकर 14 मिनट पर वापस अपने घर के बाहर लगे कैमरे में नजर आ रहे हैं परिवार का कहना है कि महज 17 मिनट के इस अंतराल में घर से निकलकर कोतवाली रोड पर जाकर वारदात को अंजाम देना मुमकिन नहीं है ​इस मामले के पीछे पुरानी रंजिश और वर्चस्व की लड़ाई बताई जा रही है साल 2024 में सुशील साहू और उनके साथियों पर रिप्पी साहू की पत्नी के साथ मारपीट करने का आरोप लगा था, जिसकी एफआईआर दर्ज है और मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि इसी रंजिश के चलते यह झूठा मुकदमा दर्ज कराया गया है
​बात करते हुए पीड़ित की सास कुसुम विश्वकर्मा ने कहा कि उन्होंने अपने दामाद की बेगुनाही साबित करने के लिए सारे पुख्ता सबूत और सीसीटीवी फुटेज पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को सौंप दिए हैं उन्होंने मांग की है कि अगर कोतवाली पुलिस भीतर बाजार से लेकर कोतवाली परिसर तक के सरकारी सीसीटीवी कैमरों की निष्पक्ष जांच कर ले, तो इस एफआईआर की सच्चाई तुरंत सामने आ जाएगी दूसरी तरफ, जब इस पूरे घटनाक्रम और सीसीटीवी टाइमिंग में अंतर को लेकर पुलिस विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया, तो इस संवेदनशील मामले पर किसी भी अधिकारी ने कुछ भी बोलने से साफ इनकार कर दिया अब देखना होगा कि उच्च अधिकारी इन वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर क्या निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करते हैं।

Post a Comment

0 Comments