सामाजिक कार्य के लिए स्वयं की पहचान आवश्यक

सागर। राष्ट्रीय सामाजिक रक्षा संस्थान के सहयोग से तथा डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र एवं सामाजिक कार्य विभाग द्वारा आयोजित सामाजिक कार्य शिक्षकों की तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के दूसरे दिन विभिन्न सामाजिक विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार प्रस्तुत किए कार्यशाला के प्रथम तकनीकी सत्र में विषय विशेषज्ञ डॉ. आर.टी.बेदरे, निदेशक ने अपने उद्बोधन में राष्ट्रीय सामाजिक रक्षा संस्थान की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह संस्थान समाज में नशा उन्मूलन  भिक्षावृत्ति तथा ट्रांसजेंडर समुदाय से जुड़े मुद्दों पर प्रभावी रूप से कार्य करता है और सामाजिक जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है इसी क्रम में समाजशास्त्र एवं सामाजिक कार्य विभाग के अध्यक्ष एवं डीन प्रो. दिवाकर सिंह राजपूत ने उद्बोधन देते हुए कहा कि समाजकार्य के क्षेत्र में कार्य करने के लिए सबसे पहले स्वयं की पहचान और आत्मबोध आवश्यक है उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संवेदनशीलता और आत्मचिंतन के बिना प्रभावी समाजकार्य संभव नहीं है कार्यशाला के दूसरे विषय विशेषज्ञ डॉ.अनुराग श्रीवास्तव सहायक लाइब्रेरियन,जवाहरलाल नेहरू केंद्रीय लाइब्रेरी ने प्रतिभागियों को इंटरनेट, ई-लाइब्रेरी, ह्यूमन लाइब्रेरी सहित विभिन्न महत्वपूर्ण ऑनलाइन संसाधनों एवं उपयोगी वेबसाइट्स के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की, जिससे शोध अध्ययन कार्य  एवं सामाजिक सुरक्षा को अधिक सशक्त बनाया जा सकता है
कार्यशाला के अगले तकनीकी सत्र में प्रो. पूरन मल यादव,उदयपुर राजस्थान  ने अपने विचार रखते हुए कहा कि समाजकार्यकर्ताओं में समरसता, सहानुभूति एवं संवेदनशीलता की भावना का होना अत्यंत आवश्यक है, तभी वे समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संतुलन स्थापित कर प्रभावी रूप से कार्य कर सकते हैं इसके बाद विषय विशेषज्ञ प्रो. हिमांशु पांडे, डीन, विधि विभाग ने सामाजिक न्याय, समानता एवं विधि के सकारात्मक आयामों पर व्याख्यान देते हुए बताया कि किस प्रकार समाजशास्त्र विज्ञान, जीवन एवं विधि आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं और ये सभी मिलकर समाज के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं कार्यशाला के अंत में प्रो. दिवाकर सिंह राजपूत के नेतृत्व में सभी प्रतिभागियों को फील्ड विज़िट के अंतर्गत शैक्षिक बहुमाध्यम अनुसंधान केंद्र, सागर ले जाया गया, जहां के निदेशक डॉ. पंकज तिवारी ने डाक्यूमेंट्री दिखाकर सभी प्रतिभागियों को वहाँ की कार्यप्रणाली से परिचित कराया इसके पश्चात अंतिम सत्र में प्रश्न-उत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने सक्रियता से भाग लेते हुए अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।

Post a Comment

0 Comments