सागर।डॉ.हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय में उत्तर-मध्यक्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र प्रयागराज,संस्कृति मंत्रालय,भारत सरकार एवं विश्वविद्यालय सांस्कृतिक परिषद् के संयुक्त तत्वावधान में 20 फरवरी से 24 फरवरी 2026 को पाँच दिवसीय राष्ट्रीय नाट्य उत्सव का आयोजन किया जा रहा है इस क्रम में 21 फरवरी को सांस्कृतिक परिषद् के परिसर में प्रसिद्ध रंगकर्मी डॉ. बृजेश रिछारिया ने लोकनाट्य परंपरा एवं नाट्यशास्त्र विषय पर व्याख्यान दिया डॉ. रिछारिया ने कहा कि लोक और शास्त्र को अलग-अलग नहीं किया जा सकता। लोक और शास्त्र परस्पर विरोधी नहीं बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं नाट्यशास्त्र इन दोनों को एक सूत्र में पिरोने का कार्य करता है उन्होंने नाटक की मूल प्रकृति को स्पष्ट करते हुए कहा कि नाटक मानव जीवन की अभिव्यक्ति है माध्यम है जहां व्यक्ति को अपनी अंतर्निहित प्रतिभा को अभिव्यक्त करने की पूर्ण स्वतंत्रता मिलती है हर व्यक्ति के भीतर सृजनात्मक क्षमता छिपी होती है आवश्यकता केवल उसे पहचानने और निखारने की है कार्यक्रम में मांगरमाटी दल के कलाकारों ने बुंदेलखंड के प्रसिद्ध लोकनृत्य बधाई की जीवंत प्रस्तुति दी जिसे खूब सराहा गया पारंपरिक वेशभूषा और लोकधुनों पर आधारित इस प्रस्तुति ने सभागार मेंउत्साह और उल्लास का वातावरण बना दिया डॉ. राकेश सोनी ने प्रतिभागी छात्रों की सराहना करते हुए उनके आत्मविश्वास और कला कौशल की प्रशंसा की यह सत्र विद्यार्थियों, कलाकारों और रंगमंच से जुड़े लोगों के लिए उपयोगी और ज्ञानवर्धक रहा विश्वविद्यालय के सांस्कृतिक परिषद परिसर में यह कार्यक्रम हर दिन दोपहर 1 बजे से आयोजित किया जा रहा है, जहाँ बड़ी संख्या में छात्र कला और संस्कृति से जुड़ रहे हैं।
0 Comments