सागर। वन हेल्थ एंड एग्रोइकोलॉजी परियोजना के अंतर्गत सागर में आयोजित ऑपरेशनल प्लानिंग कार्यशाला सफलतापूर्वक संपन्न हुई कार्यशाला का शुभारंभ डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वाय. एस. ठाकुर के उद्बोधन से हुआ अपने संबोधन में प्रो. ठाकुर ने कहा कि वन हेल्थ एवं एग्रोइकोलॉजी जैसे समन्वित विषयों पर कार्य करना आज समय की आवश्यकता है उन्होंने मानव, पशु एवं पर्यावरणीय स्वास्थ्य के बीच अंतर्संबंधों को समझते हुए समेकित प्रयासों की जरूरत पर बल दिया साथ ही उन्होंने विश्वविद्यालय की ओर से इस दिशा में हर संभव शैक्षणिक एवं तकनीकी सहयोग प्रदान करने की सहमति व्यक्त की उन्होंने ऑपरेशनल प्लान को गहराई और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से तैयार करने संबंधी महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए इस कार्यशाला में वन हेल्थ एंड एग्रोइकोलॉजी परियोजना के तहत गत एक वर्ष में किए गए कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई तथा आगामी एक वर्ष के लिए विस्तृत ऑपरेशनल प्लान तैयार करने पर विचार-विमर्श किया गया बैठक में विभागीय समन्वय, जनजागरूकता क्षमता निर्माण तथा अल्बेंडाज़ोल जैसी दवाओं के विवेकपूर्ण उपयोग के माध्यम से पर्यावरण एवं खाद्य श्रृंखला की सुरक्षा जैसे विषयों पर विशेष चर्चा की गई
कार्यक्रम में पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग की ज्वाइंट डायरेक्टर श्रीमती कल्पना दीवान, डिप्टी डायरेक्टर सोनी, वन हेल्थ एंड एग्रोइकोलॉजी परियोजना के स्टेट कोऑर्डिनेटर डॉ. अजय रामटेके GIZ की प्रोजेक्ट मैनेजर डॉ. स्टेफनी प्रूस जिला नोडल ऑफिसर डॉ. निलेश शाह डॉ.हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय,के प्रो. देवाशीष बोस एवं GIZ के स्टेट कोऑर्डिनेटर कपिल पागनीस उपस्थित रहे इसके अतिरिक्त कृषि विभाग के डिप्टी डायरेक्टर राजेश त्रिपाठी आकाशवाणी के निदेशक दीपक निषाद, वेटरिनरी विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी, तथा उद्यानिकी एवं मत्स्य विभाग के प्रतिनिधियों ने भी कार्यशाला में भाग लिया विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागाध्यक्षों एवं शिक्षकों की सक्रिय सहभागिता ने कार्यक्रम को और अधिक प्रभावी बनाया कार्यशाला के दौरान सभी विभागों ने आपसी समन्वय के साथ कार्य करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की, ताकि “वन हेल्थ” की अवधारणा को जमीनी स्तर पर प्रभावी रूप से लागू किया जा सके।
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