52वाँ अंतर्राष्ट्रीय खजुराहो नृत्य समारोह का दूसरा दिवस कथक पुरुलिया छाऊ एवं भरतनाट्यम की प्रस्तुतियां हुईं

मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग तथा उस्ताद अलाउद्दीन ख़ाँ संगीत एवं कला अकादमी द्वारा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र नागपुर मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग एवं जिला प्रशासन छतरपुर के सहयोग से आयोजित 52वें अंतर्राष्ट्रीय खजुराहो नृत्य समारोह के दूसरे दिवस कंदरिया महादेव और जगदम्बा माता मंदिरों के मध्य सुसज्जित भव्य मंच पर भाव गति और लय का अद्भुत समन्वय साकार हुआ मंदिरों की दिव्य आभा और शास्त्रीय नृत्य की सौंदर्यपूर्ण अभिव्यक्तियों ने वातावरण को अलौकिक अनुभूति से भर दिया, जहाँ प्रत्येक प्रस्तुति कला-साधना आध्यात्मिकता और भारतीय सांस्कृतिक गरिमा का सजीव प्रतिबिम्ब बनकर उपस्थित हुई कलाकारों का स्वागत पूर्व भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी मनोज श्रीवास्तव, कलेक्टर पार्थ जैसवाल निदेशक उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी प्रकाश सिंह ठाकुर एवं उप निदेशक शेखर करहाड़कर ने पुष्पगुच्छ भेंट कर किया दूसरे दिवस की पहली नृत्य प्रस्तुति उत्तर भारत के प्रचलित नृत्य कथक की रही युवा नर्तक  विश्वदीप, दिल्ली ने एकल नृत्य प्रस्तुति से जयपुर घराने की परम्पराओं को मंच पर साकार किया उन्होंने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से परंपरा, सौंदर्य और सांस्कृतिक संवेदना का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया प्रस्तुति का आरंभ शिव की राजस्थानी भाषा में रचित पारंपरिक स्तुति से हुआ जिसने आध्यात्मिकता और शास्त्रीय गरिमा का अनुपम संगम प्रस्तुत किया इसके उपरांत लयबद्धता और तकनीकी प्रवीणता का परिचय कराती ताल  तीनताल की प्रस्तुति ने दर्शकों को जयपुर घराने की विशिष्ट लयकारी से परिचित कराया प्रस्तुति के अगले चरण में राजस्थान की भावप्रधान बंदिश के माध्यम से अभिनय पक्ष की सशक्त अभिव्यक्ति प्रस्तुत की समापन में द्रुत लय के सूक्ष्म आयामों के साथ राजस्थानी धुन की सांगीतिक सुगंध को समाहित करती ताल की प्रस्तुति, लोक-रस और शास्त्रीय सौंदर्य के सुंदर सामंजस्य से सजीव अनुभव कराया अगले क्रम में प्रभात कुमार महतो झारखण्ड की पुरुलिया छाऊ की प्रस्तुति हुई। पुरुलिया छऊ नृत्य झारखण्ड और पश्चिम बंगाल का सीमावर्ती क्षेत्र में पाये जाने वाले एक आकर्षनीय एवं अत्यधिक शारीरिक संतुलन वाला लोक प्रिय नृत्य है इसमें कलाकार अपने सिर पर बड़े-बड़े ताज वाले मुखौटा के साथ शरीर पर रंगबिरंगे पोशाक पहनकर पारम्परिक वाद्ययंत्र ढोल, नगाड़ा, तथा शहनाई की धुन पर कलाकार अंग की भाव-भंगिमा झांप,उल्फा,चाल आदि अभिनय करते है प्रभात कुमार महतो एवं साथियों ने अभिमन्यु युद्ध प्रसंग को दिखाया महाभारत युद्ध के 13वें दिन की लड़ाई में अर्जुन पुत्र अभिमन्यु को चकव्यूहू में नियम विरूद्ध मारा गया था युद्ध के दौरान द्रोणाचार्य के द्वारा रचित चक्रव्यूह को भेदकर अभिमन्यु जैसे ही अंदर प्रवेश किया वहाँ मौजूद सप्तरथी द्रोणाचार्य कर्ण,कृपाचार्य,अश्वत्थमा,शकुनि,दंर्योधन दुशासन के द्वारा घेर कर पिछे से युद्ध के नियम विरूद्ध मारा गया यह घटना महाभारत के सबसे दुखद एवंभावनात्मक दृश्यों में से एक है इस प्रस्तुति को कलाकारों द्वारा बहुत ही आकर्षक एवं रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया गया 
दूसरे दिवस की अंतिम प्रस्तुति विदेशी नृत्यांगना अक्मारल काइनाजरोवा कजाकिस्तान की भरतनाट्यम नृत्य की रही उन्होंने 1993 से 1998 तक कलाक्षेत्र इंस्टीट्यूट ऑफ फाइन आर्ट्स (चेन्नई) से भारतीय शास्त्रीय नृत्य भरतनाट्यम में पत्रोपाधी की अक्मारल काइनाजरोवा की भारतीय संस्कृति एवं परम्पराओं के प्रति गहरी आस्था एवं समर्पण है उन्होंने अपनी प्रस्तुति का प्रारंभ अलारिपु के साथ किया चतुरस जाति एक ताल में निबद्ध इस प्रस्तुति के माध्यम से उन्होंने अपने गुरुओं के प्रति आदर अभिव्यक्त किया अगली प्रस्तुति वात्सल्य भाव को प्रदर्शित कर रही थी राग मालिका ताल मिश्रचापु में निबद्ध इस प्रस्तुति में माता—पिता के प्रति आदर एवं सम्मान के भाव के साथ उस रिश्ते का गहरापन उभर कर आया अगली प्रस्तुति कालिदास रचित कुमार संभवम थी जो श्रृंगार रस की प्रस्तुति थी यह राग विभाष आदिताल में निबद्ध थी इसके बाद पारम्परिक तिल्लाना एवं अंत में मंगलम के साथ प्रस्तुति का समापन किया 52वें खजुराहो नृत्य समारोह के तीसरे दिवस 22 फरवरी, 2026 को सायं 6:30 बजे संगीत नाटक अकादमी अवॉर्डी थोकचोम इबेमुबि देवी, मणिपुर का मणिपुरी नृत्य, पद्मश्री दुर्गाचरण रनवीर, ओडिशा का ओडिसी नृत्य एवं सत्रीया केन्द्र समूह, असम का सत्रीया नृत्य प्रस्तुत होगा।

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