गणतंत्र दिवस पर बंदियों को एक नई शुरुआत का अवसर

सागर। 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के अवसर पर केंद्रीय जेल सागर में बंद आजीवन कारावास से दंडित 9 पुरुष बंदियों को रिहा किया गया यह रिहाई मध्यप्रदेश शासन जेल विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के तहत प्रदान की जा रही विशेष माफी के अंतर्गत की जा रही है शासन की नीति के अनुसार पात्र बंदियों की सजा में छूट देकर उन्हें समाज की मुख्यधारा में पुनः शामिल होने का अवसर दिया जा रहा है जेल विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस विशेष माफी नीति के अंतर्गत बलात्कार, पॉक्सो अधिनियम सहित अन्य गंभीर और जघन्य अपराधों में दंडित बंदियों को किसी भी प्रकार की छूट नहीं दी गई है केवल वही बंदी इस माफी के पात्र माने गए हैं जिन्होंने निर्धारित सजा अवधि पूरी की है और जिनका जेल में आचरण संतोषजनक पाया गया है केंद्रीय जेल सागर में निरुद्ध बंदियों के पुनर्वास को ध्यान में रखते हुए उन्हें सजा अवधि के दौरान विभिन्न व्यावसायिक प्रशिक्षण भी प्रदान किए गए हैं जेल प्रशासन द्वारा बंदियों को टेलरिंग कारपेंटरी, लौहारी, भवन निर्माण मिस्त्री, प्रिंटिंग प्रेस, हथकरघा, बुनाई उद्योग सहित अन्य हुनर सिखाए गए, ताकि रिहाई के बाद वे आत्मनिर्भर बन सकें और अपनी आजीविका के साधन स्वयं अर्जित कर सकें मध्यप्रदेश शासन द्वारा आजीवन कारावास से दंडित बंदियों की रिहाई संबंधी दिशा-निर्देशों में आवश्यक संशोधन भी किया गया है संशोधित नीति के अनुसार अब ऐसे पात्र बंदियों को वर्ष में पांच अवसरों पर रिहा किया जाएगा इससे पूर्व गणतंत्र दिवस,डॉ.भीमराव अंबेडकर जयंती, स्वतंत्रता दिवस और गांधी जयंती के अवसर पर ही बंदियों को रिहाई का लाभ दिया जाता था नई नीति के तहत अब राष्ट्रीय जनजाति गौरव दिवस, 15 नवंबर को भी आजीवन कारावास से दंडित पात्र बंदियों को विशेष माफी प्रदान कर रिहा किए जाने का प्रावधान किया गया है जेल विभाग का मानना है कि इस पहल से सुधार की भावना को बढ़ावा मिलेगा और बंदियों को एक नई शुरुआत का अवसर प्राप्त होगा।

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