सागर।डॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के ललितकला एवं प्रदर्शनकारी कला विभाग द्वारा कला और शिल्प के अधिष्ठाता भगवान श्री विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर विभागीय चित्र प्रदर्शनी एवं कलाओं पर चर्चा काआयोजन बड़े उत्साह और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ कार्यक्रम के मुख्य अतिथि समाजवादी विचारक रघु ठाकुर थे जबकि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.वाय.एस. ठाकुर ने अध्यक्षता की विभागाध्यक्ष एवं संकाय प्रमुख डॉ.बलवन्त सिंह भदौरिया के नेतृत्व में यह आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती और भगवान विश्वकर्मा एवं युगपुरुष डॉ हरीसिंह गौर के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन से हुई तत्पश्चात विभागीय चित्र प्रदर्शनी का उद्घाटन फीता काटकर किया गया प्रदर्शनी में विभागाध्यक्ष,प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों की कलाकृतियाँ प्रदर्शित की गईं जिनमें समाज और जीवन के विभिन्न आयामों का जीवंत चित्रण देखने को मिला मुख्य अतिथि रघु ठाकुर ने अपने संबोधन में कहा कि “समाज और कला का रिश्ता अविभाज्य है जब-जब दुनिया में बड़े बदलाव हुए हैं उनमें कला का योगदान सबसे अधिक रहा है उन्होंने महात्मा गांधी के कला संबंधी विचारों,नंदलाल बोस की कलात्मक दृष्टि तथा रवीन्द्रनाथ टैगोर के योगदान पर विस्तार से चर्चा की प्रदर्शनी की सराहना करते हुए उन्होंने विद्यार्थियों और प्राध्यापकों के चित्रों को समाज का सजीव आईना बताया और विभागीय प्रयासों की भूरि-भूरि प्रशंसा कीअध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो.वाय.एस.ठाकुर ने कहा कि कला मनुष्य को जीना सिखाती है बदलना सिखाती है किसी भी राष्ट्र के निर्माण में कला अपनी महती भूमिका निभाती है उन्होंने विभागीय प्रदर्शनी की बधाई देते हुए इसे विद्यार्थियों की सृजनात्मकता और संवेदनशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण बताया विभागाध्यक्ष एवं संकाय प्रमुख डॉ.बलवन्त सिंह भदौरिया ने विभागीय गतिविधियों का विवरण प्रस्तुत किया और कहा कि विश्वविद्यालय की पहचान उसके विद्यार्थियों से होती है हमारा उद्देश्य है कि इस विभाग का प्रत्येक विद्यार्थी न केवल एक बेहतर कलाकार बने बल्कि एक संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक भी बने जिससे समाज के निर्माण में कला की शक्ति नए आयाम स्थापित कर सके उन्होंने प्रदर्शनी में प्राध्यापकों की सहभागिता को विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायी बताया कार्यक्रम का समापन विभाग में नए सत्र में आये नवागत विद्यार्थियों के परिचय से हुआ जिसमें बीएफए एवं एमएफ के नवागत विद्यार्थी उत्साह के साथ शामिल हुए इसी के साथ नये सत्र का सत्रारम्भ हुआ इस प्रकार कला और शिल्प के संरक्षक भगवान श्री विश्वकर्मा की जयंती पर आयोजित यह प्रदर्शनी एवं विचार गोष्ठी कला और समाज के गहरे संबंध को उजागर करते हुए विद्यार्थियों की सृजनात्मकता और विभाग की सक्रियता का जीवंत प्रमाण बनी कार्यक्रम संयोजक डॉ.सुप्रभा दास, डॉ.राकेश सोनी,आकाश मालवीय एवं डॉ. बलवन्त सिंह भदौरिया ने अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ,शॉल,श्रीफल एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर किया आभार वक्तव्य विभाग की वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ.सुप्रभा दास एवं कार्यक्रम का संचालन एवं संयोजन आकाश मालवीय ने किया
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक,अधिकारी एवं अतिथि उपस्थित रहे जिनमें प्रमुख रूप से एडवोकेट बीनू शमशेर राणा,प्रो.बद्री जैन,प्रो.जे.के.मिश्रा प्रो.जे.के.जैन प्रोक्टर डॉ.चन्दा बेन, डॉ. शशि कुमार सिंह,डॉ.सी.पी.उपाध्याय,डॉ. विवेक जायसवाल डॉ.राजेन्द्र यादव डॉ. नीरज उपाध्याय सहित बड़ी संख्या में प्राध्यापक एवं विद्यार्थी सम्मिलित हुए।
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