सागर। डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग में 2570 वीं बुद्ध पूर्णिमा के उपलक्ष्य में एक समारोह का आयोजन किया गया कार्यक्रम के मुख्य वक्ता इतिहास विभाग के प्रो. बी.के. श्रीवास्तव रहे कार्यक्रम की अध्यक्षता दर्शनशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार तिवारी ने की कार्यक्रम का संचालन कर रहे डॉ. नरेन्द्र कुमार बौद्ध ने सिद्धार्थ के जन्म से लेकर बुद्ध बनने की यात्रा एवं उनके संघर्ष पर प्रकाश डाला और एक लघु फिल्म प्रदर्शित किया
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रो. बी.के. श्रीवास्तव ने बौद्ध धर्म के अष्टांग मार्ग की व्यावहारिक महत्ता को बताते हुए कहा कि मनुष्य के चरित्र निर्माण में यह अहम भूमिका निभाता है उन्होंने भारत के तीन सर्वश्रेष्ठ बौद्ध विचारकों का जिक्र करते हुए डॉ. बी.आर. अम्बेडकर, डॉ. हरीसिंह गौर और राहुल सांकृत्यायन को याद किया और बताया कि डॉ. गौर को उनकी कृति “दि स्प्रिट ऑफ बुद्धिज्म” के लिए जापान में द्वितीय बुद्ध की उपाधि से नवाजा गया था कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार तिवारी ने दर्शनशास्त्र विभाग, सागर विश्वविद्यालय के दार्शनिक डॉ. प्रतापचन्द्र की रचनाओं “आदि बौद्ध दर्शन अनात्मवादी परिप्रेक्ष्य” एवं “द हिन्दू माइण्ड” का जिक्र करते हुए कहा कि उनके लेखन से हम न केवल तार्किक विचारों से परिचित होते हैं बल्कि शोध प्रविधि भी सीखते हैं विभाग के शोध-छात्र मयंक विनायक राय ने आधुनिक काल में आपा-धापी भरे जीवन में बुद्ध के विचारों की प्रासंगिकता बताई शोध-छात्रा अक्षरा संघई ने सक्रिय बौद्ध धर्म पर अपने विचार व्यक्त किये शोध-छात्र गौरव कुमार ने जे. कृष्णामूर्ति के विचारों पर प्रकाश डाला छात्र मेधांश शर्मा ने बौद्ध विपश्यना की महत्ता बताते हुए अपने अनुभव व्यक्त किये कार्यक्रम के अन्त में डॉ. देवस्मिता चक्रबर्ती ने आभर ज्ञापित किया इस अवसर पर दर्शनशास्त्र विभाग की शिक्षिका डॉ. अर्चना वर्मा, छात्र इकबालजीत सिंह, पूजा, प्रा.भा. इतिहास विभाग के डॉ. शिवकुमार पारोचे, इतिहास विभाग के शोध-छात्र दीपा अहिरवार, विजय प्रकाश, बालचंद, अथर्व, प्रियंका आदि सक्रिय रूप से उपस्थित रहे।
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