सागर। पूर्व गृहमंत्री, खुरई विधायक भूपेन्द्र सिंह के जन्मदिन के उपलक्ष्य में आयोजित चार दिवसीय रक्तदान शिविर के तीसरे दिन तक कुल 1529 यूनिट रक्तदान हो चुका है। इसमें से 130 यूनिट ब्लड शिविर स्थल पर ही दमोह व टीकमगढ़ जिला चिकित्सालयों की टीमों को सौंप दिया गया 19 मई मंगलवार को समापन दिवस पर रक्तदाताओं की यह संख्या कई सौ और बढ़ेगी। तृतीय दिवस का शुभारंभ करने पहुंचे मुख्य अतिथि पत्रिका समाचार पत्र के संपादक नितिन त्रिपाठी ने कहा कि यहां आकर जो देखा और जाना वह सेवा संस्कार का अद्भुत, अकल्पनीय उदाहरण है जहां रक्तदाता के रूप में इंसान देवता हो जाता है। कार्यक्रम अध्यक्ष वरिष्ठ चिकित्सक, समाजसेवी डा राजेंद्र चऊदा ने कहा कि रक्तदान का यह आयोजन सिर्फ आयोजन नहीं बल्कि मानव सेवा का महाकुंभ बन गया है। प्रदेश में अनूठा है जहां जन्मदिन को प्राण रक्षा का जरिया बनाया गया है। इस शिविर ने रक्तदान संबंधी भ्रांतियों को दूर किया है और इसके स्वास्थ्य संबंधी लाभों के बारे में आमजन को जागरूक किया है। होटल ग्रैंड दीपाली के सिग्नेचर हाल में चल रहे चार दिवसीय रक्तदान शिविर के तीसरे दिन का शुभारंभ अतिथियों द्वारा रुद्राक्ष धाम मंदिर प्रांगण में विराजमान श्री राधाकृष्ण जी, श्री दक्षिणमुखी हनुमान जी के चित्रों और बैकुंठवासी संत श्री देव प्रभाकर शास्त्री दद्दाजी की लघुप्रतिमा पर दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। मुख्य अतिथि नितिन त्रिपाठी ने अपने संबोधन में कहा कि पूर्व गृहमंत्री, खुरई विधायक भूपेन्द्र सिंह द्वारा प्रारंभ किया गया यह रक्तदान शिविर अब केवल एक आयोजन नहीं रह गया है, बल्कि मानवता की सेवा का एक विराट अभियान बन चुका है। उन्होंने कहा कि अब तक लगभग 14 हजार रक्तवीर इस सेवा अभियान से जुड़ चुके हैं, जो अपने आप में अद्भुत उदाहरण है। यह केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के जीवन से जुड़ी संवेदनाओं और सेवा का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भूपेन्द्र सिंह ने जन्मदिन को सामाजिक उत्तरदायित्व और जनसेवा से जोड़कर एक नई परंपरा स्थापित की है। यह अभियान आज सागर और पूरे बुंदेलखंड को नई पहचान दे रहा है। रक्तदान के माध्यम से किसी जरूरतमंद को जीवन देना किसी देवतुल्य कार्य से कम नहीं है। वास्तव में रक्तदान एक महाअनुष्ठान है, क्योंकि इसका सीधा संबंध किसी व्यक्ति के जीवन को बचाने से होता है। त्रिपाठी ने कहा कि सामान्य तौर पर लोग रक्तदान को सहज प्रक्रिया मान लेते हैं, लेकिन वास्तव में सुरक्षित रक्त उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती है। आज की बदलती जीवनशैली, बढ़ती बीमारियां और तनावपूर्ण जीवन के कारण स्वस्थ रक्तदाताओं की आवश्यकता लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे समय में इस प्रकार के निरंतर और व्यवस्थित रक्तदान शिविर समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाते हैं। उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कहा कि कुछ समय पहले उनके परिवार में अचानक रक्त की आवश्यकता पड़ी थी। उस समय उन्हें समझ में आया कि जरूरत के समय रक्त की व्यवस्था करना कितना कठिन होता है। जिस व्यक्ति को रक्त मिलता है, उसके मन में रक्तदाता के प्रति जो भाव उत्पन्न होते हैं, उनकी कल्पना भी नहीं की जा सकती नितिन त्रिपाठी ने कहा कि समाज को इस अभियान से प्रेरणा लेते हुए अधिक से अधिक सामाजिक कार्यों में भागीदारी करनी चाहिए। वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. राजेन्द्र चउदा ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि पूर्व गृहमंत्री, खुरई विधायक भूपेन्द्र सिंह द्वारा शुरू किया गया यह रक्तदान शिविर अब केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि मानव सेवा का महाकुंभ बन चुका है। पिछले 12 वर्षों से निरंतर इस प्रकार का विशाल रक्तदान अभियान चलाना अपने आप में असाधारण कार्य है। जन्मदिन को सेवा और जीवनदान से जोड़ने की यह प्रेरणादायी पहल समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला रही है। उन्होंने कहा कि सभी दानों में रक्तदान सर्वोपरि है, क्योंकि इससे सीधे किसी व्यक्ति का जीवन बचाया जा सकता है। भूपेन्द्र सिंह ने रक्तदान को जनजागरण का अभियान बना दिया है। आज बड़ी संख्या में युवा, महिलाएं और परिवार स्वयं आगे आकर रक्तदान कर रहे हैं, जो इस अभियान की सबसे बड़ी सफलता है। डॉ. चउदा ने रक्तदान से होने वाले स्वास्थ्यगत लाभों के विषय में कहा कि लोगों के मन में रक्तदान को लेकर अनेक भ्रांतियां रहती हैं, जबकि चिकित्सकीय दृष्टि से रक्तदान पूरी तरह सुरक्षित और लाभकारी है। नियमित रक्तदान से शरीर में रक्त निर्माण की प्रक्रिया सक्रिय होती है। रक्तदान से आयरन संतुलन में मदद मिलती है, हार्ट अटैक, लकवा, ब्लड प्रेशर की संभावना में कभी आती है।सशरीर की इम्यूनिटी इंप्रूव होती है। सामान्य रूप से वयस्क स्वस्थ मानव शरीर में 5.5 लीटर से अधिक रक्त होता है रक्तदान के समय इसमें से सिर्फ 300 एमएल रक्त निकाला जाता है। इससे रक्त बनने की प्रक्रिया और प्रवृत्ति दोनों सुधरते हैं। रक्तदान से त्वचा में कांति आ जाती है। कैंसर होने की प्रवृत्ति में कभी आती है। सभी स्वस्थ लोगों को वर्ष में एक बार तो रक्तदान करना ही चाहिए, हालांकि बाद में चार बार तक रक्तदान किया जा सकता है। डा चऊदा ने बताया कि यहां अभी तक 14000 यूनिट रक्तदान हो चुका है और इतने रक्त से 42000 लोगों की जान बचाई जा सकती है। जो यह कहते हैं कि ऐसा कैसे होता है तो उन्हें यह नहीं मालूम होता कि ब्लड में तीन तरह के कंपोनेंट आरबीसी, प्लेटलेट्स और प्लाज्मा होते हैं जो ब्लड सेप्रेटर से अलग किए जाते हैं। अलग-अलग मरीजों को ब्लड के अलग-अलग कंपोनेंट की जरूरत होती है। इस प्रकार सिर्फ आवश्यकतानुसार कंपोनेंट ही उसे चढ़ाया जाता है। इस प्रकार एक यूनिट ब्लड तीन मरीजों की जान बचाता है। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से सागर जिले में ब्लड सेप्रेटर यूनिट नहीं होने से बाहर के ब्लडबैंक से ब्लड कंपोनेंट सेप्रेट होकर आते हैं। पिछले दिनों पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह जी की कोशिश से बुंदेलखंड मेडीकल कालेज में सेप्रेटर यूनिट सहित 5000 यूनिट का ब्लडबैंक छह माह में विकसित हो रहा है। संभव है कि अगले साल के आरंभ में यह सुविधा सागर में भी मिल सकेगी। उन्होंने डाक्टर्स एसोसिएशन और सीताराम रसोई की ओर से पूर्व गृहमंत्री खुरई विधायक भूपेन्द्र सिंह और समस्त रक्तवीरों का आभार और अभिनंदन किया।
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