विश्वविद्यालय में अंतराष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर हुआ ऑनलाइन व्याख्यान

सागर। डॉक्टर हरीसिंह गौर केन्द्रीय विश्वविद्यालय के जीवनपर्यंत शिक्षा विभाग द्वारा अपने स्थापना दिवस एवं 59वें अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के सु-अवसर पर ऑनलाइन व्याख्यान का आयोजन किया गया जिसका विषय डिजिटल युग में साक्षरता डिजिटल लर्निंग और जीवन कौशल था आज के डिजिटल युग में साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए एक नई पहल की शुरुआत की गई है, जिसका फोकस डिजिटल सीखने और जीवन कौशल के विकास पर है प्रमोटिंग लिटरेसी इन द डिजिटल एरा अभियान के तहत, लोगों को तकनीकी प्रगति के साथ तालमेल बनाए रखने और रोजमर्रा की चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक कौशल से लैस करने का लक्ष्य रखा गया है यह विचार मुख्य वक्ता प्रो.प्रदीप कुमार मिश्र, निदेशक, उच्च शिक्षा में नीति अनुसन्धान केंद्र,राष्ट्रीय शैक्षिक योजना और प्रशासन संस्थान,नई दिल्ली ने जीवनपर्यंत शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित अंतराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर आयोजित ऑनलाइन व्याख्यान में व्यक्त किया उन्होंने बताया कि वर्तमान समय युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों को डिजिटल उपकरणों के उपयोग,ऑनलाइन शिक्षा और सूचना प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग का प्रशिक्षण प्रदान करने पर केंद्रित है डिजिटल साक्षरता न केवल शिक्षा को सशक्त बनाती है, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी खोलती है इस पहल को सफल बनाने के लिए स्कूलों, कॉलेजों और सामुदायिक केंद्रों में कार्यशालाओं का आयोजन किया जाना चाहिए प्रो.मिश्र ने इस संदर्भ में उच्च शिक्षा संस्थानों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया सीखने और जीवन कौशल के लिए मोबाइल तकनीक जरूरी प्रो.ठाकुर ऑनलाइन कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. यशवंत सिंह ठाकुर ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि डिजिटल युग में साक्षरता का विस्तार पारंपरिक पढ़ाई से आगे बढ़कर तकनीकी दक्षता और जीवन कौशल के एकीकरण पर जोर देता है यह कदम भारत को डिजिटल रूप से सशक्त समाज बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है उन्होंने जोर देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय समाज को न केवल डिजिटल उपकरणों का उपयोग करना सिखाएं बल्कि उनके खतरों से कैसे बचा जाये यह भी सिखाएं कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. योगेश कुमार पाल ने किया वही कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत डॉ. रानी दुबे,विभाग अध्यक्ष ने किया कार्यक्रम में डॉ. चिट्टी बाबु पुच्चा ने आभार ज्ञापित किया इस ऑनलाइन कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षक और विद्यार्थी जुड़े थे जिन्होंने प्रश्नों के माध्यम से अपने सक्रिय सहभागिता की।

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