बाबा साहब डॉ.भीमराव आंबेडकर के डी.एस.सी. थीसिस के 100वे वर्ष पर संगोष्ठी आयोजित

सागर.डॉ.आंबेडकर चेयर एवं डॉ. आंबेडकर उत्कृष्टता केंद्र,डॉ.हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के द्वारा एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी जिसका विषय रुपए की समस्या उसकी उत्पत्ति एवं समाधान वर्तमान अर्थ संदर्भ विषय पर आयोजित की गई संगोष्ठी मे मुख्य वक्ता डॉ. वीरेंद्र मटसेनिया ने विस्तारपूर्वक डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की थीसिस की प्रासंगिकता एवं ब्रिटिश राज के दरम्यान भारतीय रुपए को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थान दिलाने हेतु अपने शोध के माध्यम से अनेक तर्क प्रस्तुत किए और औपनिवेशिक व्यवस्था द्वारा भारतीय अर्थव्यवस्था के होने वाले शोषण को दुनिया के समक्ष रखा बाबासाहब का स्पष्ट अभिमत था की जब तक भारतीय अर्थव्यवस्था में स्वर्णमान गोल्ड स्टैन्डर्ड प्रचलन में नहीं आएगा तब तक भारतीय अर्थव्यवस्था अंतरराष्ट्रीय मानकों को प्राप्त नहीं कर सकेगी महज 32 वर्ष की आयु मे बाबासाहब ने लंदन स्कूल ऑफ ईकनामिक्स में अपनी डी.एस.सी.थीसिस प्रस्तुत की और उस जमाने के स्थापित अर्थशास्त्रियों में प्रो. एडविन कैनन एवं प्रो.जे एम कींस के समकक्ष खड़े हुए, यह भारतीयों के लिए बड़े गर्व की बात थी बाबा साहब ने भारतीय मौद्रिक व्यवस्था के बेहतर नियमन के लिए केन्द्रीय बैंक की वकालत की, जिसके फलस्वरूप भारत में 1 अप्रैल 1935 को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की स्थापना हुई प्रो.चंदा बेन ने मुख्य अतिथि बतौर अपने उद्बोधन में कार्यक्रम की रूपरेखा एवं विषय प्रवर्तक की भूमिका अदा करते हुए कहा कि डॉ.आंबेडकर का योगदान अविस्मरणीय है, उन्होंने आधुनिक भारत के निर्माण एवं लोकतंत्र की स्थापना में अदूतीय भूमिका निभाई
कार्यक्रम के विशिष्ठ अतिथि प्रो.अशोक अहिरवार ने कहा कि टेक्नोलॉजी के कारण अर्थव्यवस्था में भी परिवर्तन हो रहा है इसलिए हमें टेक्नोलॉजी के साथ-साथ चलने की आवश्यकता है उन्होंने स्पष्ट किया की बाबासाहेब द्वारा आज से 100 साल पहले ही एक भविष्यद्रष्टा के तौर पर विभिन्न प्रावधान किए जो आज भी प्रासंगिक है संगोष्ठी के अध्यक्षता आंबेडकर चेयर के प्रभारी प्रो. राजेश गौतम ने की और उन्होंने अपने उधबोधन में कहा की हम सब डॉ.आंबेडकर के आर्थिक योगदान को भूलते जा रहे हैं ,जबकि उन्होंने एकेडमिक वर्ल्ड के लिए अनेक महत्वपूर्ण कार्य किये है इसलिए उनके कार्यों को कभी भुलाया नहीं जा सकता है डॉ.सतीश सी.ने आभार प्रदर्शन किया कार्यक्रम का संचालन डॉ. देवेन्द्र कुमार,सहायक प्राध्यापक, आंबेडकर चेयर के द्वारा किया गया कार्यक्रम में प्रो. रश्मि जैन,प्रो.रत्नेश दास,प्रो.सुशील कासब डॉ.रामहेत गौतम,डॉ.अरविन्द कुमार,डॉ.अरविन्द गौतम,डॉ.महेंद्र कर्णा, डॉ.कमलकांत,अजब सिंह, मासूम आलम, मदन पटेल, डालचंद अहिवार, एवं विभिन्न विभागों के शोधार्थी - प्रिया सिंह सेंगर, डॉ. अभय कुमार, हिमांशु लारिया, गब्बर, संतोष, हरिओम, संजय, शुभांगी, प्रतिभा, जितेंद्र कबीर, लोकेश बदुले, प्रदीप सिंह, शिवम कबीर, आकाश सिमोलिया, गिरिजा शर्मा, रामकिशोर एवं बड़ी संख्या मे विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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