सागर रंग महोत्सव के दूसरे दिन कलाकारों ने की ‘मृगतृष्णा’ की नाट्यप्रस्तुति

सागर.डॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर के सांस्कृतिक परिषद और युगसृष्टि थियेटर ग्रुप,सागर के संयुक्त तत्त्वावधान में विश्वविद्यालय के प्रदर्शनकारी कलाविभाग में चल रहे आठ दिवसीय ‘प्रथम सागर रंग महोत्सव 2025’ के दूसरे दिन अनुपम कुमार लिखित एवं डॉ.राकेश सोनी द्वारा निर्देशित ‘मृगतृष्णा’ की नाट्य प्रस्तुति हुई. 27 मार्च से 3 अप्रैल तक यह महोत्सव आयोजित किया जा रहा है.प्रत्येक दिवस एक नाटक का मंचन हो रहा है."मृगतृष्णा" एक महत्वपूर्ण नाटक है,जो समाज,धर्म और भौतिक लालसा के प्रभाव को गहराई से उजागर करता है.नाटक की कथा आर्थिक शक्ति,धार्मिक प्रभाव और हाशिए पर खड़े समुदायों,विशेषकर महिलाओं, के संघर्ष को केंद्र में रखती है.यह दर्शाता है कि किस प्रकार धन और सोने की असीम लालसा मानवीय मूल्यों और संबंधों को नष्ट कर देती है. इसकी प्रभावशाली कहानी और विचारोत्तेजक विषयवस्तु ने दर्शकों और समीक्षकों का ध्यान आकर्षित किया, जिससे यह समकालीन भारतीय रंगमंच में एक महत्वपूर्ण नाटक के रूप में स्थापित हुआ है.इस नाट्य प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करने वाले कलाकारों में करालक अर्पित दुबे, देवसोम आनंद अग्रवाल,मणिभद्र शुभम पटेल,रत्नवल्लरी रितिका सेन, चंद्रकेतु अप्रितम मिश्रा,अनंग मेखला सिमरन जैन,मदनाक्ष-प्रिंस चौरसिया चारुकेसी संजना पटेल,शौंडिक अमन ठाकुर,सीवली यश्विनी गौंड,सुप्रिया पूर्वा लोधी,कुंडला महिमा पयासी,शतवाहू अखिलेश तिवारी,श्यामा सोनाली सेन, चुल्ल श्रेष्टि-दीपेन्द्र लोधी,कृषबाहू सागर ठाकुर,श्रवतोदर मयंक सेन सिन्धांत चौरसिया,चोर देव वृष अहिरवार,अन्य  मयंक सेन उमेश पटेल शुभांक रजक अर्चना सिन्धांत चौरसिया थे.    


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