सागर. डॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय में भारतवर्ष का राष्ट्रीय पावन पर्व स्वतंत्रता दिवस धूमधाम से मनाया गया. इस अवसर पर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता ने ध्वजारोहण किया तथा राष्ट्रगान के बाद सभा को संबोधित किया. उन्होंने भारतवर्ष के राष्ट्रीय पावन पर्व 78वें स्वतंत्रता दिवस की बधाइयाँ एवं शुभकामनायें देते हुए कहा कि आज के ही दिन 1947 को हमारे देश ने वर्षों की दासता की जंजीरों को तोड़ कर स्वतंत्रता के सूर्य का वरण किया था। स्वंतत्रता केवल स्थिति ही नहीं बल्कि एक भावनात्मक रूहानी उपलब्धि है। स्वतंत्रता अधिकार है तो एक जिम्मेदारी भी है, स्वतंत्रता नीति भी है और निष्ठा भी है। हमें उन लोगों को भी याद रखना होगा जिन्होंने आजादी के लिए अपने जीवन का उत्सर्ग कर दिया। हमारी आज की ख़ुशी की नीव में आजादी के दीवानों का बलिदान छुपा हुआ है। अपने महान राष्ट्र निर्माताओं के त्याग और संघर्ष के प्रति आदर रखना हमारा कर्तव्य है. आज का दिन अपनी स्वाधीनता का सम्मान करने के साथ ही हमारे अमर सेनानियों के प्रति अपनी हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करने का भी दिन है।उन्होंने कहा कि कुलपिता ज्ञान ऋषि और अद्वितीय भविष्यदृष्टा डॉ. सर हरीसिंह गौर के जीवन और कर्म को भी स्मरण करना होगा जिन्होंने अपनी मातृभूमि के लिए ज्ञान के वसंत का सपना देखा और अपना सम्पूर्ण जीवन एवं अपनी सम्पूर्ण संम्पत्ति का दान कर इस विश्वविद्यालय की स्थापना की थी। हम सभी डॉ. सर हरीसिंह गौर के उत्तराधिकारी हैं, ऐसे में हमारी जिम्मेदारी बहुत बढ़ जाती है। हम अपने देश की स्वतंत्रता का सम्मान करने के साथ-साथ इसे और अधिक प्रखर, सर्वसमावेशी और समृद्ध करने के लिए निरन्तर प्रयत्नशील रहें। हम जिस भी भूमिका में हैं, उसके प्रति न्याय करें। देश की प्रगति में अपनी त्रुटिहीन भूमिका का निर्वहन करते रहे हैं। जीवंत अनुशासन, समृद्ध नैतिकता, संवेदित मनुष्यता, और सांस्कृतिक एकता के द्वारा ही हम स्वतंत्रता के वसंत को अपने जीवन में उतार सकते हैं और देश को सुनहरा भविष्य दे सकते हैं। देश के एक महत्वपूर्ण ज्ञान-केन्द्र का हिस्सा होने के कारण यह हमारा दायित्व है कि स्वंतत्रता के मूल्य, प्रभाव और प्रक्रिया को और अधिक तार्किक, समावेशी, लोकतांत्रिक बनाते हुए ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में वैश्विक चुनौतियों हेतु खुद को समर्थ बना सकें। भारतीयता के मूल्यबोध को, भारतीय भूमि की अद्वितीय ज्ञान-परम्परा को नये सिरे से हमें खोजना, पाना और व्याख्यायित करना होगा। उधार की सम्पदा और आयातित ज्ञान तात्कालिक तौर पर हमें कुछ राहत दे सकते हैं किन्तु हमारे होने का वास्तविक स्वत्व-बोध और भारत की आत्मप्रतिमा का सही अक्स भारतीय ज्ञान की समृद्ध पूँजी से ही स्थापित किया जा सकता है। भारत सरकार इस दिशा में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 जैसी नवाचारी, तार्किक और भविष्योन्मुखी शिक्षा-परम्परा के साथ पूरे देश को पारम्परिक भारत-बोध और आधुनिक भाव-बोध से परिचित और प्रशिक्षित कराने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। भारत सरकार के इस महान और जरूरी संकल्प के साथ हमारा विश्वविद्यालय स्वयं को सार्थक सिद्ध कर रहा है। मेरी यह सदिच्छा है कि डॉ. गौर के सपनों के अनुकूल हमारे विद्यार्थी अपनी प्रतिभा, दक्षता और कौशल के साथ राष्ट्र की प्रगति में अपनी श्रेष्ठमत हिस्सेदारी का निर्वहन करें। हम विश्वविद्यालय के शिक्षकों, अधिकारियों और कर्मचारियों की बेहतर शैक्षणिक एवं प्रशासनिक संलग्नता के साथ अपने विद्यार्थियों में संवेदनशील बौद्धिकता, संस्कारित अनुशासन, लोकतांत्रिक चेतना, वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सक्षम के साथ उच्चतम मानवीय मूल्यों से युक्त नागरिक बनाने की दिशा में विभिन्न स्तरों पर कार्य कर रहे हैं.
उन्होंने वर्ष भर की विश्वविद्यालय के शिक्षकों, अधिकारियों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं कर्मचारियों की उपलब्धियों को साझा करते हुए कहा कि हम लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर तेजी से प्रगति और समृद्धि के रास्ते पर हैं. उन्होंने वर्ष की शैक्षणिक, प्रशासनिक, सांस्कृतिक गतिविधियों एवं आयोजनों की लम्बी श्रृंखला का जिक्र करते हुए निरंतर ऐसी गतिविधियों को बढ़ाने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय निरंतर भौतिक स्थापत्य की दिशा में भी प्रगति कर रहा है.
उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार के सभी सदस्यों से अपील करते हुए कहा कि आज का दिन उत्सव के साथ-साथ आत्मनिरीक्षण का भी दिन है। विकास और प्रगति के पथ पर हम कई पड़ाव हासिल कर चुके हैं , पर यह हमारी मंजिल नहीं हैं। अभी हमें विश्वस्तरीय शिक्षा केन्द्र बनने के लिए लम्बी दूरी तय करनी है। यदि हमारा संकल्प पक्का है, हमारी निष्ठा अगाध है तो हम निश्चित ही डॉ. गौर के सपनों के अनुरूप अपने विश्वविद्यालय को संवार सकेंगे। मेरा विश्वास है कि हमारे विद्यार्थियों की प्रतिभा राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर ज्ञान-विज्ञान और शोध के क्षेत्र में अवश्य प्रतिष्ठित होगी। हमारा देश एक बार फिर वैश्विक स्तर पर नेतृत्व हेतु सक्षम होगा। स्वतंत्रता दिवस के इस पावन पर्व पर हम माँ, माटी और मातृभूमि की सच्ची सेवा और समर्पण का संकल्प लें.
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के एनसीसी कैडेट्स ने सलामी दी. समारोह में विश्वविद्यालय के शिक्षक, छात्र-छात्राएं, शोध-छात्र, अधिकारी, कर्मचारी, शहर के गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे
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