सागर। डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया इसमें विश्वविद्यालय के अनेक शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने गुरु का हमारे जीवन में महत्त्व पर अपने विचार साझा किये डॉ. देबस्मिता चक्रबर्ती ने गुरु पूर्णिमा के दार्शनिक महत्व पर चर्चा करते हुए महर्षि वेदव्यास, भगवान बुद्ध तथा श्रीरामकृष्ण-स्वामी विवेकानन्द की परम्परा के माध्यम से गुरु-शिष्य सम्बन्ध की प्रासंगिकता को रेखांकित किया डॉ. अर्चना वर्मा ने अपने वक्तव्य में कहा कि सच्चा गुरु आत्म-अन्वेषण के मार्ग को आलोकित कर शिक्षार्थी में निहित प्रज्ञा को जागृत करता है डॉ. नरेन्द्र कुमार बौद्ध ने अपने वक्तव्य में भगवान महावीर के शिष्य गणधर की महत्ता बताते हुए कहा कि भगवान बुद्ध के अवतरण, द्वन्द्व, गर्जना, संघ की प्रतिष्ठा, वर्षावास और अर्हतों का उदय होने के कारण आषाढ़ पूर्णिमा को ही गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है विभागाध्याक्ष डॉ. अनिल कुमार तिवारी ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि गुरु में श्रद्धा के बिना ज्ञान नहीं हो सकता कार्यक्रम में डॉ. मनोहरलाल चौरसिया खरक सिंह, गब्बर, विभा पाण्डेय, मयंक विनायक राय विश्वास नायक सहित विभाग एवं अन्य विभागों के विद्यार्थी एवं शोधार्थी उपस्थित रहे कार्यक्रम का संचालन शोधार्थी अक्षरा सिंघई ने किया।
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