खुरई। सुप्रसिद्ध कवि डॉ.कुमार विश्वास ने खुरई डोहला महोत्सव-2025 के दूसरे दिन अपनी ऊर्जा से ओतप्रोत प्रस्तुति से वातावरण को तरंगित कर दिया। उनका लोगों ने एक घंटे तक इंतजार किया लेकिन यह प्रतीक्षा सार्थक हो गई। उनकी कविताओं, गजलों और गीतों से किला मैदान का माहौल कभी राष्ट्रप्रेम से भर गया, कभी भक्ति भाव से औश्र कभी वीरता और ओज से। पूर्व गृहमंत्री, खुरई विधायक भूपेन्द्र सिंह का उन्होंने पूरे कार्यक्रम में अनेक बार उल्लेख करते हुए उनकी विचारधारा नीत राजनीति की प्रशंसा की और युवा भाजपा नेता अविराज सिंह,सागर नगर निगम की महापौर श्रीमती संगीता सुशील तिवारी,नपा अध्यक्ष श्रीमती नन्हींबाई अहिरवार सहित गणमान्य लोगों ने दीपप्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कोहरे के कारण फ्लाइट लेंडिंग में देर होने से डॉ.कुमार विश्वास के आने में विलंब हुआ और दर्शकों को उनकी बेसब्री से प्रतीक्षा की। रंगारंग आतिशबाजी के साथ विश्वास के सहायक कुमार कुशलेंद्र ने उनके आगमन की सूचना दी।डॉ.कुमार ने कहा कि तुम्हारा नेता भूपेंद्र सिंह इतना प्यारा है जिसके बारे में लोग कहते हैं कि उसने यहां सबके लिए बहुत किया है। मुझे बुलाने में लोगों के खजाने खाली हो जाते हैं लेकिन तुम्हारे नेता की मोहब्बत में आया हूं यहां तक।यह उस एक आदमी की मोहब्बत का परिणाम है कि मुंबई के सारे कलाकार यहां आने को तरसते हैं। उन्होंने कहा कि 5 स्टारों में कविता पढ़ने में वह आनंद नहीं आता जो यहां खुरई के खुले मैदान में हजारों ऊर्जा से भरे लोगों के बीच आ रहा है।उन्होंने कहा कि लोग कहते हैं कि दिल्ली में चुनाव हैं और मैं कविता पढ़ रहा हूं वहां होता तो तिहाड़ में दारू का हिसाब दे रहा होता। उन्होंने कई टिप्पणियों में वामपंथियों की खिंचाई की।उन्होंने कहा खुरई, सागर, जबलपुर सुंदर जगह हैं यहां की भाषा में संगीत है। उन्होंने बुंदेली बोली। उन्होंने कहा कि मैं गुना, अशोक नगर बहुत आया हूं। उन्होंने डा विश्वास को आज का तुलसी, सूरदास, क्रांतिकारी, बागी और राष्ट्रवादी के रूप में उनका परिचय दिया। आते ही उन्होंने बताया कि मैं लगभग दिनभर से चल रहा हूं रायपुर से यहां पहुंचा हूं। उन्होंने कहा कि मैं बड़ी मुश्किल से इतनी दूर तक आया हूं। यहां की भीड़ देखकर लगता है कि हर साल यहां आना चाहिए। इतने हजार लोग इतनी दूर सुनने आ गये आश्चर्य की बात है।उन्होंने डा विश्वास को आज का तुलसी, सूरदास, क्रांतिकारी बागी और राष्ट्रवादी के रूप में उनका परिचय दिया। आते ही उन्होंने बताया कि मैं लगभग दिनभर से चल रहा हूं रायपुर से यहां पहुंचा हूं। उन्होंने कहा कि मैं बड़ी मुश्किल से इतनी दूर तक आया हूं। यहां की भीड़ देखकर लगता है कि हर साल यहां आना चाहिए। इतने हजार लोग इतनी दूर सुनने आ गये आश्चर्य की बात है।